चंद्रपुर में सर्पदंश से 6 वर्षीय मासूम की मौत, जिवती की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
Chandrapur Child Death: जिवती के लछमागुडा में सर्पदंश से 6 वर्षीय बालक की मौत। परिजनों का आरोप- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एम्बुलेंस उपलब्ध न होने से इलाज में देरी हुई, जिससे जान गई।
- Written By: केतकी मोडक
मृतक प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मीडिया)
Chandrapur Snakebite Child Death: चंद्रपुर जिले के जिवती तहसील के लछमागुडा गांव में सर्पदंश का शिकार हुए छह वर्षीय बालक की समय पर उपचार नहीं मिलने से दुखद मृत्यु हो गई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण आगे के उपचार के लिए ले जाने में देरी होने का गंभीर आरोप परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने लगाया है। इस घटना के बाद एक बार फिर दूरस्थ क्षेत्रों की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि लछमागुडा निवासी समीर मारोती आत्राम (6) घर में सो रहा था, तभी तड़के उसे एक जहरीले सांप ने काट लिया। सुबह काफी देर तक जब वह नहीं उठा, तब परिजनों को संदेह हुआ। इसी दौरान घर में जहरीला सांप दिखाई देने पर परिजनों ने तुरंत समीर को पाटण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
वहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे आगे के उपचार के लिए गडचांदूर ग्रामीण अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन उस समय केंद्र पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने से काफी विलंब होने का आरोप लगाया गया है। अंततः परिजन एक निजी वाहन से उसे गडचांदूर लेकर निकले, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी हालत और बिगड़ गई। गडचांदूर ग्रामीण अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।
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घटना के बाद आक्रोशित नागरिकों ने जिवती तहसील की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीव्र नाराजगी व्यक्त की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दूरस्थ क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने के कारण मासूमों और मरीजों की जान लगातार खतरे में पड़ रही है।
पहले गर्भवती की गई जान
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पहले इसी क्षेत्र में एक गर्भवती महिला की भी समय पर उपचार न मिलने के अभाव में मौत होने की दर्दनाक घटना सामने आई थी। आरोप है कि गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों को महिला को झोली में डालकर करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले जाना पड़ा था।
रास्ते में ही उसने बच्चे को जन्म दिया और अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने के कारण उसकी मृत्यु हो गई थी। उस घटना का दर्द अभी ताजा ही था कि अब एक और मासूम की मौत ने स्थानीय लोगों के आक्रोश को और अधिक बढ़ा दिया है।
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समय पर सुविधा मिलती तो बच सकती थी जान
नागरिकों का कहना है कि दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानव जीवन से जुड़ा बेहद संवेदनशील विषय है। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त एम्बुलेंस, आवश्यक जीवन रक्षक दवाएं, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और चौबीसों घंटे तत्काल उपचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
समीर के असमय निधन से आत्राम परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और पूरे लछमागुडा गांव में शोक का माहौल व्याप्त है। अब नागरिक प्रशासन से यह तीखा सवाल कर रहे हैं कि क्या समय पर एम्बुलेंस और उपचार मिलता, तो इस मासूम की जान बचाई जा सकती थी?
