17 साल से नहीं बढ़ी स्कॉलरशिप: महंगाई में छात्र पूछ रहे- 500 रुपये में कैसे पढ़ें?
Maharashtra News: महाराष्ट्र में पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों की स्कॉलरशिप 2007 से नहीं बढ़ी है। महंगाई बढ़ने से 500-1000 रुपये की यह राशि पर्याप्त नहीं रही।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)
Maharashtra Scholarship News: महाराष्ट्र में जिला परिषद और सरकारी स्कूलों में पिछड़े वर्ग के छात्र-छात्राओं का शालाओं को छोड़ने का प्रमाण कम करने और उनकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक न्याय विभाग छात्रवृत्ति योजना चला रहा है। लेकिन, डेढ दशकों के बाद भी इस छात्रवृत्ति में एक नये पैसे की बढ़ोतरी नही हुई है।
महंगाई के अनुपात में इसमें वृद्धि करने की मांग की जा रही है। बताया जाता है कि 2007 से छात्रवृत्ति की राशि जस की तस है। जब से छात्र के हाथ में थोड़ी सी रकम आती है, उन्हें पढ़ाई पर खर्च करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। पुरानी दर पर मिलने वाली स्कॉलरशिप से सरकार का असली मकसद खतरे में पड़ रहा है।
स्कॉलरशिप योजना का असली मकसद पिछड़े वर्ग के परिवारों की लड़कियों और लड़कों को स्कूल में बनाए रखना है। सावित्रीबाई फुले छात्रवृत्ति इसलिए दी जाती है ताकि उनकी स्कूल में उपस्थिति अच्छी हो और उन्हें अपनी शिक्षा जारी रखने के दौरान वित्तीय सहायता मिल सके।
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शाला सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि
2007 के बाद मुद्रास्फीति और विद्यालय सामग्री की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है। माता-पिता को नोटबुक, गणवेश और अन्य खर्चों के लिए भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ता है।
महंगाई दिन-ब-दिन बढ़ रही है। तो वे सिर्फ़ 500 रुपये महीने में कैसे गुज़ारा करेंगे? यह सवाल अब विद्यार्थी पूछ रहे हैं। ये स्कॉलरशिप लड़के और लड़कियों के लिए हैं।
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कक्षा 5 से 10 में पढ़ने वाले विशिष्ट जाति घुमंतू जनजाति, अनुसूचित जाति की लड़कियों के लिए सावित्रीबाई फुले स्कॉलरशिप योजना, माध्यमिक स्कूल में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए मेरिट स्कॉलरशिप योजना, विट्ठल रामजी शिंदे परिक्षा शुल्क, शिक्षा शुल्क स्कॉलरशिप योजना, सफाई और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक सेक्टर में काम करने वाले माता-पिता के बच्चों के लिए स्कॉलरशिप योजना, और कक्षा 9 से 10 में पढ़ने वाले छात्रों के लिए भारत सरकार की प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना लागू की जा रही है।
चंद्रपुर जिले में 2500 छात्र योजना के पात्र
जिला परिषद और सरकारी स्कूलों में अनुसूचित जाति प्रवर्ग के छात्र सावित्रीबाई फुले स्कॉलरशिप योजना के लिए पात्र हैं। चंद्रपुर जिले में 2500 से ज्यादा विद्यार्थी इस स्कॉलरशिप योजना के लिए पात्र हैं। छात्रवृत्ति की राशि हर महीने नहीं दी जाती, बल्कि दस महीने तक एक साथ दी जाती है।
यह सालाना छात्रवृत्ति की रकम सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में जमा की जाती है। इसके लिए छात्रों का बैंक अकाउंट उनके आधार कार्ड से लिंक होना ज़रूरी है। पिछड़े वर्ग के छात्रों को स्कॉलरशिप तो दी जाती है, लेकिन वह बहुत कम होती है। हर साल हर चीज़ पर दस प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। इसलिए, कुछ छात्रों ने प्रतिक्रिया दी है कि विद्यार्थी को मिलने वाली स्कॉलरशिप बहुत कम है।
ऊंट के मुंह में जीरा
सावित्रीबाई फुले छात्रवृत्ति योजना के तहत कक्षा 5 से 10 में पढ़ने वाली विशेष घूमंतु जनजाति, अनुसूचित जाति की लड़कियों के लिए यह योजना लागू है। जिसमें कक्षा 5 से 7 के लिए 600 रुपये और कक्षा 8 से 10 के लिए 1000 रुपये, माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति की छात्राओं के लिए, कक्षा 5 से 7 के लिए 500 रुपये और कक्षा 8 से 10 के लिए 1000 रुपये दी जाती है।
विट्ठल रामजी शिंदे परीक्षा शुल्क, शिक्षा शुल्क छात्रवृत्ति योजना अंतर्गत कक्षा 10 के लिए 415 रुपये और स्वच्छता और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक क्षेत्रों में काम करने वाले माता-पिता के बच्चों हेतु भी इतनी ही राशि का प्रावधान है। कुल आंकडों को देखा जाए तो यह उंट के मूंह में जीरे जैसा है।
