चंद्रपुर कहलाएगा ‘टाइगर जीला’, वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए अंडरपास, ओवरपास और मुआवज़ा नीति पर मुहर
Chandrapur Wildlife News: चंद्रपुर में बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष पर वन मंत्री गणेश नाईक की अध्यक्षता में बैठक हुई। 'टाइगर जिला' दर्जा और वन्यजीवों के लिए अंडरपास बनाने का फैसला हुआ। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
- Written By: केतकी मोडक
राज्य वन मंत्री गणेश नाईक की अध्यक्षता में मंत्रालय में उच्चस्तरीय बैठक (सोर्स- फोटो नवभारत)
Chandrapur Tiger Jila Special Status Proposal: चंद्रपुर जिले में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने गंभीर कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में राज्य के वन मंत्री गणेश नाईक की अध्यक्षता में मंत्रालय में हाल ही में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक इको-प्रो संस्था के अध्यक्ष बंडू धोतरे के अनशन के दौरान सरकार द्वारा दिए गए लिखित आश्वासन के अनुसार आयोजित की गई। बैठक में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए विभिन्न प्रस्तावों पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए।
बैठक में विधायक प्रवीण दटके, इको-प्रो के अध्यक्ष बंडू धोतरे तथा वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष एवं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। बैठक में ‘चंद्रपुर जिला बाघ-मानव संघर्ष तकनीकी समिति’ की रिपोर्ट को लागू करने के लिए स्थानीय स्तर पर तत्काल बैठक आयोजित कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बनेगा अंडरपास
साथ ही चंद्रपुर जिले को ‘टाइगर जिला’ का विशेष दर्जा देने के लंबित प्रस्ताव को गति देने, घोड़ाझरी और कन्हारगांव अभयारण्यों के हस्तांतरण, वहां आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति तथा मूल-चंद्रपुर और बामणी-नवेगांव राष्ट्रीय राजमार्ग पर वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अंडरपास एवं ओवरपास निर्माण के संबंध में संबंधित विभागों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए।
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संघर्ष कम करने उठाए जाएंगे प्रभावी कदम
इसके अलावा ब्रह्मपुरी एवं अन्य वन क्षेत्रों में बाघों की वहन क्षमता का अध्ययन, गोसेखुर्द नहर परियोजना के अंतर्गत शमन योजना, कट-एंड-कवर एवं ओवरपास निर्माण, तेंदुआ-मानव संघर्ष कम करने के लिए ‘तेंदुआ समस्या मुक्त ग्राम योजना’, व्याघ्र पर्यटन से स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु कम्युनिटी रिसॉर्ट एवं होमस्टे मॉडल विकसित करने, वन्यजीवों से होने वाले नुकसान के मुआवजा वितरण की प्रक्रिया सरल बनाने, वनरक्षकों को सहायक उपलब्ध कराने, पीआरटी सदस्यों का मानदेय नियमित करने तथा ‘वनमित्र’ अवधारणा लागू करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
वन मंत्री गणेश नाईक ने कहा कि इन मांगों के पीछे कोई व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं है। सरकार वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह सकारात्मक है तथा भविष्य में संघर्ष कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
