पिंजरे में कैद आदमखोर बाघ, पूर्व सरपंच समेत कईयों की ली जान, ग्रामीणों के दबाव में एक्टिव वन विभाग

Man-eater tiger Maharashtra: चिमूर तहसील के आंबोली जंगल में दहशत फैलाने वाले आदमखोर बाघ को वन विभाग ने पकड़ा। कई लोगों की जान लेने वाले इस बाघ के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
Man-eater tiger Maharashtra: चिमूर तहसील के आंबोली जंगल में दहशत फैलाने वाले आदमखोर बाघ को वन विभाग ने पकड़ा। कई लोगों की जान लेने वाले इस बाघ के पकड़े जाने से ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
आदमखोर बाघ पिंजरे में कैद (सौजन्य-नवभारत)
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Chimur Wildlife Operation: चिमूर तहसील के कई गांवों में दहशत का पर्याय बने आदमखोर बाघ को अंतत: वन विभाग ने पिंजरे में कैद करने में सफलता प्राप्त कर ली है। यहां एक पूर्व सरपंच सहित कई लोगों को अपना शिकार बनानेवाले इस बाघ के पकड़े जाने से गांववासियों व वन विभाग ने राहत की सांस ली। कई लोगों को मारकर खानेवाले इस बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग पर किसान व लोगों का भारी दबाव था।

मंगलवार की शाम वन विभाग को आंबोली के जंगल में आदमखोर बाघ को पकड़ने में सफलता मिली। बाघ के पकड़े जाने के बाद इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली। हालाकि यह बाघ वही है जिसके हमले में कई लोगों की जान गई अथवा कोई और है इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि चिमूर के भिसी शंकरपुर की आंबोली सीमा पर 5 नवंबर को शंकरपुर निवासी ईश्वर भरडे की बाघ के हमले में दर्दनाक मौत हो गई थी।

खेतों में जाना दुश्वार

इसके बाद भी यह बाघ कई लोगों को नजर आया था। इस बाघ के आतंक से विशेष रुप से आंबोली परिसर में कृषक महिला पुरुषों का खेतों पर जाना दुश्वार हो गया था। अभी कुछ ही दिन पहले कपास के खेत में काम करनेवाली महिला के सामने ही बाघ आ जाने की घटना हुई थी। सतर्कता बरतने से उस महिला की जान बच गयी थी। लोगों ने वनविभाग पर इस बाघ को पकडने के लिए भारी दबाव बनाया था।

किया था चक्काजाम

बाघ के हमले में मृत व्यक्ति का शव न देने की भूमिका के साथ चक्काजाम आंदोलन भी आंबोली शंकरपुर परिसर में किया गया था। वनविभाग को ठोस आश्वासन देना पडा और इसके बाद वनविभाग ने अपनी पूरी ताकत से इस बाघ को पकडने की कार्यवाही शुरु कर दी थी। जगह जगह पिंजरे, कैमरा ट्रैप लगाने के साथ ही संवेदनशील जगहों की गश्त की जा रही थी।

इस बीच मंगलवार को आंबोली के जंगल में ही यह बाघ पिंजरे में कैद हो गया। 5 नवंबर की घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया था। गांव और आसपास के लोगों ने बाघ को काबू करने के लिए विरोध प्रदर्शन के अलावा भारी दबाव बना लिया था। जिससे वनविभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की रातों की नींद उड़ गई थी।

इस बाघ के पकड़े जाने के बाद भी वनविभाग संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी नजर बनाए हुए है और जरुरी कार्यवाही शुरु होने की बात वनविभाग के सूत्रों ने कही है। इस बाघ को पकडे जाने के बाद लोगों ने राहत की सांस तो ली है परंतु यह राहत कब तक बरकरार रहेगी, यह आनेवाला समय ही बताएगा। आंबोली, शंकरपुर और नजदिकी परिसरो में आतंक मचानेवाला बाघ ही पकडा गया है या अन्य बाघ है, इसपर अभी कोई बयान सामने नहीं आया है।

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