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सूखे के कारण जिले में पेयजल और सिंचाई के पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन जलस्रोतों के नियोजन को लेकर बैठकों का दौर चला रहा है।
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सूखे के दौरान कोल वॉशरियों का कामकाज बंद करने और उनके पानी के इस्तेमाल पर तत्काल नियंत्रण लगाने की मांग की है।
वडेट्टीवार के अनुसार, एक टन कोयले के प्रसंस्करण में करीब 1,500 लीटर पानी खर्च होता है। उन्होंने कोल वॉशरियों के जलदोहन की समीक्षा करने की भी मांग की है।
Chandrapur Coal Washeries: चंद्रपुर व परिसर में पेय जलसंकट की स्थिती गंभीर होनेवाली है। सूखे के इस दौर में किसान पानी को तरस रहे वहीं कई उद्योगों पर ताले लगने की - प्रबल संभावनाएं जताई जा रही है। ऐसे में कोल वॉशरिज को पानी देने को लेकर बहस छिड़ती दिखाई दे रही है।
नेता प्रतिपक्ष विजय वडेट्टीवार ने तो कोल वॉशरियों को बंद करने की मांग की है। चंद्रपर एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने भी कोल वॉशरिज के बाहरी राज्यों के वॉशरिज संचालकों में हड़कंप मच गया है। जिले में फिलहाल पानी के नियोजन को लेकर माथापच्ची शुरु है।
प्रशासन पर दबाव है। किसानों को पानी दे या पीने के लिए आरक्षित करे ? इस दुविधा में बैठकों का दौर चल पडा है। इस स्थिति में जिले में कोल औचित्य पर सवाल किया है। जिससे वॉशरिज शुरु है। जिले की कोल वॉशरियों से केपीसीएल (कर्नाटका), एमपीजेनको (मध्यप्रदेश) और एनटीपीसी (उडीसा) में कोयला भेजा जा रहा है। इन आपूर्तीकर्ता वॉशरिज में घुग्घुस की महा माया इन्फ्रा डेवलपर्स, सास्ती राजुरा की महा मिनरल मायनींग कॉर्पोरेशन एनएम ग्लोबल और राजुरा पांढरपौनी की भाटिया कोल वॉशरिज का समावेश है।
वॉशरिज से कोयला लेनेवाले उद्योगों के जानकारों का कहना है कि उसके कोयले में स्पांज आयरन समेत अन्य बैड मटेरियल की भारी मिलावट हो रही है। राजुरा पुलिस थाने में 10 अक्टुबर 2026 को दर्ज एफआईआर के अनुसार कोयले में बैड मटेरियल मिलाने का दावा भी किया गया था।
इन कोल वॉशरिज को लेकर बीते समय में भारी बवाल मचा था। सूत्रों का कहना है कि 11 साल तक बंद कोल वॉशरिज को 4-5 साल से किसने शुरु किया? यह रहस्य बना है। मिलावट के कारण ही बिजली की दरें बढने की बात उद्योग क्षेत्र के जानकार अब दावे के साथ कह रह है। गौरतलब है कि जून 2026 में कांग्रेस नेता वडेट्टीवार ने घटिया कोयले का मुद्दा सदन में उठाया था।
एमआईडीसी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन अध्यक्ष मधुसूदन रुंगटा ने कहा कि चंदपुर जिला प्रशासन पानी के नियोजन की तैयारी कर रहा है। एमआईडीसी के कई उद्योग सांसत में है। पानी की कमी में कोल वॉशरिज का क्या मतलव है?
कांग्रेस विधायक दल नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि चंद्रपुर जिले में किसान सिंचाई के पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं कोयला वॉशरियों में बड़े पैमाने पर पानी का उपयोग हो रहा है। एक टन कोयले के प्रसंस्करण में करीब 1,500 लीटर पानी खर्च होता है, जिसपर तत्काल नियंत्रण लगाने और उनका कामकाज बंद करने की जरुरत है। साथ ही इनके जलदोहन की समिक्षा होनी चाहिए।