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चंद्रपुर जिले की सिंदेवाही तहसील में बाघ के हमले में शनिवार को किसान नानाजी कामडी और रविवार को आंगनवाड़ी सेविका प्रेमिला पुंडलिक महाडोरे की मौत हो गई।
पलसगांव जाट निवासी नानाजी कामडी शनिवार को खेत में तिल की फसल काटने गए थे।
भेंडाला निवासी प्रेमिला महाडोरे रविवार को छुट्टी होने के कारण तिल की फसल काटने खेत में गई थीं।
Chandrapur Tiger Attack Deaths: खेतों में फसल काटने जाना अब जानलेवा साबित हो रहा है। जिले के सिंदेवाही तहसील में बाघ के हमलों ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। महज दो दिनों में बाघ ने एक किसान और एक महिला की जान ले ली।
शनिवार को पलसगांव जाट के खेत में किसान नानाजी कामडी (55) की मौत हुई, तो रविवार को खातगांव के खेत क्षेत्र में तिल की फसल काटने गईं भेंडाला निवासी आंगनवाड़ी सेविका प्रेमिला पुंडलिक महाडोरे (50) बाघ का शिकार बन गई। लगातार दो मौतों से किसानों, खेतमजदूरों और जंगल से सटे गांवों में दहशत फैल गई है।
सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र के पलसगाव जाट निवासी नानाजी कामडी शनिवार को तिल की फसल काटने खेत में गए थे। इसी दौरान बाघ ने अचानक उन पर हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। शाम तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने खेत में जाकर तलाश की, जहां उनका शव मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
सिंदेवाही तहसील में लगातार दो दिनों में हुई इन मौतों ने खेतों में काम करने वाले किसानों और मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जंगल से सटे खेतों में बाघों की मौजूदगी के चलते ग्रामीणों में भय बढ़ रहा है। नागरिकों ने संवेदनशील इलाकों में वन विभाग की गश्त बढ़ाने, लोगों को सतर्कता संबंधी निर्देश देने और मानव-बाघ संघर्ष रोकने के लिए ठोस उपाय लागू करने की मांग की है।
चंद्रपुर जिले में मानव-वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। पिछले वर्ष बाघ के हमलों में कुल 47 नागरिकों की जान गई थी। वहीं, इस वर्ष अब तक वन्यजीवों के हमलों में 35 नागरिकों की मौत हो चुकी है। लगातार हो रही मौतों से नागरिकों में आक्रोश बढ़ रहा है। इस संघर्ष को रोकने के लिए प्रभावी और ठोस उपाययोजना की मांग जोर पकड़ रही है।
पहली घटना की दहशत कम भी नहीं हुई थी कि रविवार को खातगांव के खेतशिवार में दूसरी दर्दनाक घटना सामने आई। भेडाला निवासी आंगनवाड़ी सेविका प्रेमिला पुडलिक महाडोरे की छुट्टी होने के कारण वे सुबह तिल की फसल काटने खेत में गई थीं। दोपहर तक घर नहीं लौटने पर परिजनों ने खेत में तलाश शुरू की, खोजबीन के दौरान वे मृत अवस्था में मिली। बाघ के हमले में उनकी मौत होने की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग को सूचित किया गया।