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ताजा जनगणना रिपोर्ट के अनुसार अभयारण्य में वयस्क, युवा और शावकों सहित लगभग 140 बाघ मौजूद हैं।
ताडोबा और ब्रह्मपुरी वन क्षेत्र सहित चंद्रपुर जिले में बाघों की बड़ी संख्या बताई जा रही है।
भोजन, पानी और अपने क्षेत्र की तलाश में जंगल से बाहर निकलने वाले बाघों के कारण मानवों पर हमलों का खतरा बढ़ रहा है।
Tadoba Andhari Tiger Reserve: चंद्रपुर जिले के ताडोबा अभयारण्य सहित बाहरी क्षेत्रों के जंगलों में बाघों की संख्या में निरंतर हो रही वृद्धि और उससे बढ़ रही मानव बाघ संघर्ष की घटनाओं को कम करने हेतु ताडोबा के बाघों को अन्यत्र स्थलांतरित करने के प्रयास अब तेज हो गए है।
गौरतलब है कि, ताडोबा अंधारी बाघ परियोजना में प्रतिवर्ष बाघों की संख्या में बेतहाशा वृध्दि देखी जा रही है। यह परियोजना कुल 1727 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है, जिसमें 625 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ताडोबा का कोर जोन है, जबकि 1100 वर्ग किलोमीटर का बफर जोन शामिल है।
ताडोबा अभयारण्य में ताजा सेंसस रिपोर्ट के अनुसार करीब 140 बाघ है, जिनमें वयस्क, युवा और कब्स का समावेश है। इतनी बड़ी तादाद में मौजूद बाघों के लिए ताडोबा अभयारण्य का मौजूदा क्षेत्र मुक्त विचरण के लिए बेहद कम साबित हो रहा है, जिससे बाघ खाद्य एवं पानी के साथ साथ अपना एक अलग अधिकार क्षेत्र तलाशने के लिए जंगलों से बाहर निकल रहे है। जिससे मानवों पर बाघ के हमलों की संख्या बढ़ती जा रही है। ब्रम्हपुरी वन क्षेत्र में भी तकरीबन इतने ही बाघ मौजूद है, कुल मिलाकर समूचे जिले में बाघों की अनुमानित संख्या 350 से अधिक आंकी गयी है।
जिले में मानव और बाघों के बीच संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को टालने की दृष्टि से स्थानीय वन विभाग भरसक प्रयास कर रहा है, किंतु वे सभी प्रयास विफल साबित हो रहे है। ऐसे में अब स्थानीय वन प्रशासन ने ताडोबा तथा जिले के अन्य क्षेत्रों से पकड़े जा चुके बाघों को अन्यत्र स्थलांतरित करने हेतु प्रयास तेज कर दिए है। चंद्रपुर के ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर में फिलहाल 15 बाघ पिंजरों में बंद है।
यह वे बाघ है, जिन्हें जिले के अलग अलग क्षेत्रों में मानवों पर निरंतर हमलों के बाद पकड़ा गया है। कुछ बाघों को कमजोरी या घायल अवस्था में पकड़ा गया है। उक्त पकड़े गए बाघों को देश के अन्य अभयारण्यों में या जूलॉजिकल पार्क में स्थलांतरित करने के लिए स्थानीय वन विभाग संपर्क करने में जुटा हुआ है। यहां का एक बाघ शीघ्र ही नागपुर स्थित गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क में शिफ्ट किया जा रहा है।