

Highlights:
चंद्रपुर जिले की सावली तहसील में दहशत फैलाने वाले नर बाघ को वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया।
बाघ के हमले में तीन चरवाहों की जान गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ था।
डार्ट से बेहोश करने के प्रयास विफल होने के बाद वन विभाग ने विशेष पिंजरे का सहारा लिया।
Chandrapur Tiger T-122: चंद्रपुर जिले की सावली तहसील में पिछले एक महीने से दहशत बनकर घुम रहे टी-122 नर बाघ को आखिरकार वन विभाग ने पिंजरे में कैद कर लिया। तीन लोगों की जान लेने और एक व्यक्ति को घायल करने वाले इस बाघ को डार्ट मारकर बेहोश करने के कई प्रयास विफल रहे।
आखिरकार उसे पकड़ने के लिए लगाए गए 30×30 फीट के विशाल पिंजरे में वह फंस गया। राज्य में पहली बार अपनाई गई इस विशेष पद्धति की सफलता से सामदा सहित आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। सावली वनपरिक्षेत्र के व्याहाड़ उपवनक्षेत्र अंतर्गत सामदा, निलसनी, पेडगांव, सोनापुर और वाघोली-बुटी परिसर में टी-122 की आवाजाही थी। जंगल में मवेशी चराने गए तीन चरवाहों पर हमले में उनकी मौत हो गई थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हुआ था।
इसके बाद से किसान, चरवाहे और ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे थे। नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए 27 सितंबर से बाघ को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा था। मानवीय गतिविधियों की आहट मिलते ही चकमा देने वाले बाघ को डार्ट से बेहोश करने में लगातार मुश्किलें आ रही थीं।
इसके बाद वन विभाग ने पारंपरिक तरीके के बजाय 30×30 फीट का विशाल पिंजरा तैयार किया। इसमें आकर्षित करने के लिए चारे के रूप में एक जानवर रखने की व्यवस्था की गई थी। पिंजरे की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सौर ऊर्जा से चलने वाले सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे।
आखिरकार इसी पिंजरे में बाघ कैद हो गया। मुख्य वनसंरक्षक रामानुजम और विभागीय वन अधिकारी राजन तलमले के मार्गदर्शन में चले अभियान का नेतृत्व सहायक वनसंरक्षक विकास तरसे तथा सावली के वनपरिक्षेत्र अधिकारी विनोद धुर्वे ने किया। अभियान में वन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ता भी शामिल रहे।
अभियान शुरूः 27 सितंबर से
पिंजरे का आकारः 30×30 फीट
निगरानीः 9 गरुड़ सीसीटीवी कैमरे, 20 ट्रैप कैमरे और 3 लाइव कैमरे
मैदानी टीमः करीब 50 से 60 वनकर्मी और वन मजदूर चौबीसों घंटे तैनात
बाघ का हमलाः तीन लोगों की मौत, एक व्यक्ति घायल