

Highlights:
नागपुर संभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने राजेश अडूर को कांग्रेस का वैध गुटनेता घोषित किया।
आयुक्त ने सुरेंद्र अड़बाले की गुटनेता पद पर नियुक्ति को अवैध करार दिया।
इस विवाद के पीछे कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के समर्थकों के बीच राजनीतिक खींचतान सामने आई है।
Chandrapur Municipal Corporation: स्थानीय मनपा मेंकांग्रेस गुट नेता पद को लेकर चल रहा विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है, इस विवाद के बीच गुरुवार को पुनः एक बार यह विवाद उस वक्त उभरकर सामने आया जब नागपुर संभागीय आयुक्त ने सुरेंद्र अड़बाले से यह पद निकालकर इस पद पर राजेश अडूर की नियुक्ति को वैध करार कर दिया।
इस उठापटक में मनपा के कांग्रेस गुट नेता पद के चल रहे विवाद को लेकर कांग्रेसी नेता विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धानोरकर के बीच की प्रतिद्वंदिता की लड़ाई पुनः एक बार सामने आ गयी है। गौरतलब है कि, जिले में कांग्रेस के बीच वडेट्टीवार और धानोरकर समर्थकों में विवाद चल रहा है। इसी विवाद के चलते मनपा में कांग्रेस गुटनेता पद पर कभी वडेट्टीवार समर्थक अडूर की नियुक्ति की जा रही है तो कभी इस पद पर धानोरकर समर्थक अड़बाले की नियुक्ति हो रही है।
मनपा में कांग्रेस पार्षदों का कभी अडूर को समर्थन हासिल हो रहा है तो कभी पासा पलटकर यह पार्षद अड़बाले के साथ खड़े हो रहे है। गुटनेता पद को लेकर चल रहे इस विवाद के बीच गुरुवार को नागपुर संभागीय आयुक्त विजयलक्ष्मी बिदरी ने एक अहम फैसला सुनाते हुए इस पद पर राजेश अडूर की नियुक्ति को वैध बताते हुए पद पर आसीन सुरेंद्र अड़बाले को अवैध करार घोषित किया। आयुक्त के इस फैसले से अब पुनः एक बार वडेटटीवार और धानोरकर के बीच चल रहे संघर्ष ने नया मोड़ ले लिया है।
मनपा में कांग्रेस गुटनेता को लेकर न्यायिक लड़ाइयों और बहुमत के दावों की वजह से कांग्रेस के अंदर के झगड़े बार बार सामने आ रहे है। इस विवाद में आयुक्त के नए फैसले के बाद यह लीडरशिप का खेल अब रुकेगा या इस पर कोई नई न्यायालयीन लड़ाई शुरू होगी इस ओर ही सबकी निगाहें लगी है।
उल्लेखनीय है कि, स्थानीय मनपा का आम चुनाव 15 जनवरी, 2026 को हुआ था तथा इसमें कांग्रेस के कुल 27 प्रत्याशी बतौर पार्षद निर्वाचित हुए थे। 6 फरवरी को कांग्रेस पार्षदों ने विभागीय आयुक्त के पास समर्थन पत्र देठे हुए बहुमत से राजेश अडूर को अपना ग्रुप लीडर चुना था। लेकिन, 16 जून को संगीता भोयर समेत 16 कॉर्पोरेटर्स ने अडूर की लीडरशिप बदलने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पेश किया, इसके मुताबिक, 21 जुलाई को डिविजनल कमिश्नर ने अडूर का नाम गुटनेता पद से रद्द करते हुए सुरेंद्र अडबाले का नाम ग्रुप लीडर के तौर पर दर्ज कर दिया।
अडूर ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी, जब मामला न्यायप्रविष्ट था, तब 28 सितंबर को कांग्रेस के 15 पार्षद पुनः एकत्रित हुए और उन्होंने अडूर को फिर से अपना ग्रुप लीडर मानते हुए वैसा समर्थन पट आयुक्त को सौंपा। इस प्रस्ताव पर पार्षदों के हस्ताक्षरों को वेरिफाई करने के लिए 7 अक्टूबर को आयुक्त के पास परसजडों की प्रत्यक्ष उपस्थिति के साथ सुनवाई हुई। इस बीच, अडूर द्वारा हाई कोर्ट में दायर एक याचिका पर कोर्ट ने 30 अक्टूबर को यह फैसला दिया कि, इस विवाद पर संभागीय आयुक्त ही फैसला दें। इस ऑर्डर के मुताबिक, डिविजनल कमिश्नर ने मेजॉरिटी पर विचार करने के बाद अडूर के पक्ष में फैसला सुनाया।