चंद्रपुर की महाकाली यात्रा में उमड़ा जनसैलाब, झरपट नदी में हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी, देखें तस्वीरें

Chandrapur Mahakali Yatra: चंद्रपुर की ऐतिहासिक महाकाली यात्रा संपन्न! 164 साल पुरानी यमुनामाई की परंपरा और झरपट नदी में पवित्र स्नान। दर्शनों के लिए उमड़ा जनसैलाब। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
Thousands of devotees gathered for the historic Mahakali Yatra in Chandrapur. Highlights include the 164-year-old Yamunamai horse tradition and holy dip in Jharpat river.
महाकाली यात्रा (सौजन्य-नवभारत)
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Mahakali Temple Chaitra Purnima: संपूर्ण विदर्भ में आदिशक्ति के रूप में विख्यात देवी महाकाली की ऐतिहासिक यात्रा गुरुवार को चैत्र पूर्णिमा की मुख्य पूजा से संपन्न हुई। चैत्र पूर्णिमा यात्रा का मुख्य दिन होने से मूर्ति के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में हजारों श्रध्दालुओं की भीड़ जुटी। मंदिर परिसर श्रध्दालुओं से खचाखच भरा हुआ था। उमस भरी गर्मी में भी लोगों की अटूट आस्था का नजारा देखते ही बन पा रहा था।

श्रध्दालुओं को भीड़ के कारण असुविधा और अव्यवस्था का भी सामना करना पड़ा। गुरुवार तड़के 3.30 बजे सम्पूर्ण मंदिर परिसर को पानी से धोया गया, मंदिर की स्वच्छता के बाद देवी माता महाकाली का श्रृंगार उतारकर दूध, दही से माता का स्नान, महाअभिषेक, फिर से श्रृंगार कर माता की महाआरती की गई। दर्शनों के लिए श्रध्दालु देर रात से कतारबध्द होकर एकत्रित हो गए थे।

दर्शनों का प्रारंभ सुबह 6.30 बजे से शुरू हुआ। इसके पश्चात सभी दर्शनार्थियों द्वारा पूजा विधि का सिलसिला चलता रहा। दोपहर 1 बजे मुख्य आरती कर घट को विसर्जित किया गया। इसके साथ ही देवी की यात्रा समाप्त हो गयी। वैसे देर शाम तक भक्तों का देवी महाकाली के दर्शन व पूजा का दौर चलता रहा। कतार में लगे श्रध्दालुओं ने मंदिर में देवी की प्रतिमा के दर्शन किए और पूजा की।

Mahakali यात्रा में चैत्र पूर्णिमा का पवित्र स्नान

हर वर्ष की तरह चैत्र पूर्णिमा को पूजा सामग्री लिए श्रध्दालुगन कतार बध्द होकर अपनी बारी की प्रतीक्षा में लीन थे। बारी-बारी से एक-एक कर देवी का मुख दर्शन और पूजा की प्रक्रिया पूरी कराई गई। पूजा के लिए श्रध्दालुओं की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने परिसर में पुख्ता बंदोबस्त कर रखा था। हजारों की संख्या में श्रध्दालुओं ने झरपट नदी में पवित्र स्नान कर देवी के दर्शन किए।

Thousands of devotees gathered for the historic Mahakali Yatra in Chandrapur. Highlights include the 164-year-old Yamunamai horse tradition and holy dip in Jharpat river.
महाकाली यात्रा (सौजन्य-नवभारत)

नांदेड, मराठवाड़ा व आंध्रप्रदेश से आए श्रध्दालुओ ने मंदिर के पास से बहने वाली झरपट नदी में डूबकी लगाकर चैत्र पूर्णिमा का पवित्र स्नान किया। घाट पर किसी तरह की अनुचित घटना को रोकने के लिए गोताखोरों को तैनात रखा था। स्वयंसेवी संस्था एवं सामाजिक संगठनों की ओर से पुरी, भाजी, मसाला भात का वितरण किया जा रहा था। इसके अलावा दूरदराज से आए श्रध्दालुओें द्वारा मंदिर परिसर में खुली जगह पर भोजन बनाते हुए नजर आए।

जटपुरा गेट, अंचलेश्वर गेट की विधिवत पूजा

देवी महाकाली की ऐतिहासिक यात्रा में सहभागी होने मराठवाड़ा से आने वाले श्रध्दालुओ की बरसों से शहर के मुख्य प्रवेशद्वार जटपुरा गेट व अंचलेश्वर गेट की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। दोनों गेटों की पूजा किए बिना कोई भी बाहरी श्रध्दालु मंदिरों की ओर कूच नही करता है।

Thousands of devotees gathered for the historic Mahakali Yatra in Chandrapur. Highlights include the 164-year-old Yamunamai horse tradition and holy dip in Jharpat river.
महाकाली यात्रा में भक्तों का कतारें (सौजन्य-नवभारत)

इस वर्ष भी बड़ी संख्या में यात्रा में शामिल होने पहुंचे यात्री इस परंपरा को पूरे विधि विधान से पालन करते हुए नजर आ रहे थे। मंदिर की ओर कूच करने से पहले श्रध्दालुओं के जत्थों ने इन गेट पर नारियल फोड़कर एवं सिंदूर-फूल से पूजा की। श्रध्दालुओं की असीम श्रध्दा को देखते हुए दोनों की गेट के पास नारियल, फूल और सिंदूर बेचने वालों की दुकानें सजी हुई थीं।

घोड़े पर सवार होकर पहुंचा यमुनामाई का पोहा

  • चैत्र महीने में भरने वाले महाकाली यात्रा में घोड़े पर सवार होकर चंद्रपुर पहुंचने की यमुनामाई की परम्परा 1860 से आज भी उनके वंशज बरकरार रखे हुए है।
  • यमुनामाई की यात्रा नांदेड़ जिले के शेलगांव से चंद्रपुर के महाकाली मंदिर तक होती है।
  • पिछले 164 वर्षों से यमुनाबाई का पेाहा हर वर्ष जत्रा में पहुंचता है। जो कि इस जत्रा का मुख्य आकर्षण होता है।
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