चंद्रपुर में ‘तेंदुआ समस्या मुक्त ग्राम’ योजना अटकी, मानव-तेंदुआ संघर्ष बढ़ने पर जल्द क्रियान्वयन की उठी मांग
Chandrapur Leopard Attack News: चंद्रपुर में 200 मौतों के बावजूद 'तेंदुआ मुक्त ग्राम' योजना लंबित है। फंड और प्रशासनिक मंजूरी न मिलने से ग्रामीण क्षेत्रों में मानव-तेंदुआ संघर्ष का खतरा बरकरार है।
- Written By: रूपम सिंह
Chandrapur news leopard attack (फोटो- सोशल मीडिया)
Chandrapur wildlife conservation News: चंद्रपुर मानव-तेंदुआ संघर्ष को स्थायी रूप से कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई ‘तेंदुआ समस्या मुक्त ग्राम’ योजना जिले में अब तक लागू नहीं हो सकी है। पिछले पांच वर्षों में तेंदुए के हमलों में करीब 200 लोगों की मौत दर्ज होने के बावजूद यह योजना अमल के इंतजार में है, जिससे इसकी तात्कालिक आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वर्ष 2013 में लगातार 8 लोगों की मौत और 2018 में अर्जुनी क्षेत्र में 5 लोगों के मारे जाने के बाद बंडू धोतरे ने इस योजना की अवधारणा प्रस्तुत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांव स्तर पर स्वच्छता, झाड़ी नियंत्रण, प्रकाश व्यवस्था और जनसहभाग के माध्यम से तेंदुओं की गांवों में आवाजाही को कम करना है।
जिले का लगभग 42 प्रतिशत क्षेत्र वन क्षेत्र होने के कारण जंगल से सटे गांवों में चंद्रपुर तेंदुओं की गतिविधियां बढ़ रही हैं। वन विभाग के अनुसार, आवारा कुत्ते और छोटे पालतू जानवर तेंदुओं को गांवों की ओर आकर्षित करते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए गांवों के आसपास झाड़ियां हटाना, स्ट्रीट लाइट लगाना, सौर ऊर्जा आधारित फेंसिंग करना और कचरा प्रबंधन जैसे उपाय प्रस्तावित किए गए हैं।
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योजना का क्रियान्वयन नहीं किया
8 मई 2024 को चंद्रपुर जिला परिषद में हुई बैठक में इस योजना को सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी, लेकिन फंड की कमी और अंतिम प्रशासनिक स्वीकृति न मिलने के कारण अब तक इसका क्रियान्वयन शुरू नहीं हो पाया है। इस बीच बंडू धोतरे ने योजना को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए कहा कि, “घटना के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि पहले से ही निवारक उपाय किए
जाएं।”
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योजना के प्रमुख उपाय
गांव के आसपास झाड़ियां हटाना, सड़कों व प्रवेश द्वारों पर स्ट्रीट लाइट लगाना, आवारा कुत्तों की नसबंदी करना, मृत पशुओं का उचित निपटान, सौर ऊर्जा से चलने वाली फेंसिंग, जैविक बाड़ और खरपतवार नियंत्रण।
योजना लागू क्यों नहीं हुई?
- फंड की उपलब्धता स्पष्ट नहीं
- अंतिम प्रशासनिक मंजूरी लंबित
- विभिन्न विभागों में समन्वय की कमी
- निर्णय प्रक्रिया में देरी
स्थानीय स्तर पर कार्यवाही का अभाव
तैयार खाका होने के बावजूद योजना लागू न होने से ग्रामीणों में असंतोष बढ़ रहा है और प्रशासन से जल्द निर्णय लेने की मांग तेज हो गई है।
