चंद्रपुर में इराई नदी की मिट्टी बेचने का खेल उजागर, QR कोड से हो रही थी अवैध वसूली

Silt Soil Theft: चंद्रपुर की इराई नदी गहरीकरण में मिट्टी-गाद की अवैध ऑनलाइन बिक्री का पर्दाफाश होने पर जिलाधिकारी वसुमना पंत ने खुद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
Irai River Soil Scam In Chandrapur
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Irai River Soil Scam In Chandrapur: चंद्रपुर शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली इराई नदी के गहरीकरण कार्य के नाम पर एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला वित्तीय घोटाला सामने आया है। नदी को गहरा करने के दौरान निकलने वाली उपजाऊ मिट्टी और गाद को बिना किसी सरकारी अनुमति के अवैध रूप से बाजार में बेचा जा रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस अवैध कारोबार के लिए खुलेआम एक 'क्यूआर कोड' का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके जरिए सीधे ऑनलाइन पेमेंट लिया जा रहा है।

शहर के बीचों-बीच चल रहे इस गोरखधंधे से चंद्रपुर महानगरपालिका और जिला प्रशासन का राजस्व विभाग पूरी तरह बेखबर बना हुआ था। हालांकि, इस धांधली के उजागर होते ही जिलाधिकारी वसुमना पंत ने सोमवार शाम को खुद प्रत्यक्ष रूप से नदी तट पर जाकर स्थिति का मुआयना किया, जिससे संबंधित विभागों और ठेकेदारों में हड़कंप मच गया है। खबर भेजे जाने तक इस निरीक्षण पर जिलाधिकारी की आधिकारिक भूमिका या कार्रवाई की रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी थी।

पार्षद पप्पू देशमुख ने मौके पर पहुंचकर पकड़ी चोरी

इराई नदी गहरीकरण कार्य में चल रही इस बड़ी धोखाधड़ी को मनपा पार्षद तथा इराई नदी गहरीकरण समिति के सक्रिय सदस्य पप्पू देशमुख ने उजागर किया है। देशमुख ने जब मनपा के एक ऑन-ड्यूटी इंजीनियर और 'इराई नदी बचाओ जनांदोलन समिति' के एक सदस्य के साथ गहरीकरण के कुल 7 निर्धारित स्थानों का दौरा किया, तब इस घोटाले की परतें खुलीं। पार्षद देशमुख का सीधा आरोप है कि मुआयने के दौरान उन्हें नदी से निकाली गई मिट्टी के कई विशाल टीले अपनी जगह से पूरी तरह नदारद मिले। उन्होंने कहा कि मनपा और राजस्व विभाग की आंखों में धूल झोंकते हुए कुछ रसूखदार लोग इस उपजाऊ मिट्टी को परस्पर (सीधे) ही बाजार में खपा रहे हैं।

पूछताछ की तो ठेकेदार और मनपा ने कहा— "मिट्टी चोरी हो गई!"

पप्पू देशमुख ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मिट्टी के टीलों के अचानक गायब होने पर मनपा प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित काम देख रहे ठेकेदार से जवाब मांगा, तो दोनों ही पक्षों की ओर से बेहद गैर-जिम्मेदाराना और असंबद्ध सफाई दी गई। अपनी कमियों को छिपाने के लिए मनपा और ठेकेदार ने बेहद अजीबोगरीब दलील देते हुए कहा कि नदी तट से मिट्टी चोरी हो गई है। ठेकेदार के इस गोलमोल जवाब के बाद भ्रष्टाचार के आरोप और पुख्ता हो गए हैं। इस धांधली के खिलाफ देशमुख सहित जन विकास सेना की कॉरपोरेटर मनीषा बोबड़े और प्रतीक्षा येरगुडे ने भी मोर्चा खोल दिया है और मनपा की मेयर, मनपा आयुक्त तथा स्थायी समिति सभापति से मामले की उच्चस्तरीय गहन जांच करने की लिखित मांग की है।

क्यूआर कोड दिखाकर सीधे खाते में ट्रांसफर हो रहा पैसा

इस पूरे मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू डिजिटल पेमेंट से जुड़ा है। पार्षद पप्पू देशमुख ने मेयर, स्टैंडिंग कमेटी चेयरमैन और कमिश्नर को सबूत के तौर पर वह 'क्यूआर कोड' भी सौंप दिया है जिसका उपयोग इस अवैध धंधे में किया जा रहा था।

आरोप है कि राजस्व विभाग की किसी भी तरह की रॉयल्टी या आधिकारिक अनुमति के बिना, सीधे इस क्यूआर कोड पर ऑनलाइन भुगतान लेकर बिना रेत वाली यह कीमती उपजाऊ मिट्टी निजी ग्राहकों और बिल्डरों को ऊंचे दामों पर सीधे बेची जा रही थी। अब देखना यह होगा कि जिलाधिकारी वसुमना पंत के इस औचक निरीक्षण के बाद इस 'मिट्टी चोर गिरोह' और लापरवाह अधिकारियों पर क्या कानूनी गाज गिरती है।

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