चंद्रपुर बांबेझरी और कुसुंबी गांवों के किसानों के जमीन विवाद पर पालकमंत्री का आश्वासन, समाधान के लिए प्रशासन
Chandrapur News: चंद्रपुर में बांबेझरी-कुसुंबी जमीन विवाद से जहर सेवन की घटना के बाद पालकमंत्री ने अस्पताल में किसानों से मुलाकात कर न्याय का भरोसा दिया, जांच व समाधान की प्रक्रिया तेज
- Written By: रूपम सिंह
पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके (सोर्स - नवभारत)
Chandrapur Dr. Ashok Uike News: चंद्रपुर बांबेझरी और कुसुंबी गांव के किसानों की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर राज्य सरकार और जिला प्रशासन पूरी तरह संवेदनशील है तथा इस मामले का उचित समाधान निकालने के लिए सकारात्मक पहल की जा रही है। यह आश्वासन राज्य के आदिवासी विकास मंत्री एवं चंद्रपुर जिले के पालकमंत्री डॉ. अशोक उईके ने दिया। सोमवार को जमीन विवाद के चलते जहर सेवन करने वाले किसानों से 14 अप्रैल को जिला सामान्य अस्पताल में मुलाकात कर पालकमंत्री ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और उनका हालचाल जाना।
उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी किसान को बेसहारा नहीं छोड़ेगी और राज्य सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। इस अवसर पर विधायक किशोर जोरगेवार, जिलाधिकारी वसुमना पंत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह, मनपा आयुक्त अकुनुरी नरेश, मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. मिलिंद कांबले, जिला शल्य चिकित्सक डॉ. महादेव चिंचोले, चंद्रपुर जिला पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन, निवासी उपजिलाधिकारी दगडू कुंभार, उपविभागीय अधिकारी विशालकुमार मेश्राम (चंद्रपुर),
रवींद्र माने (राजुरा) सहित अन्य अधिकारी व डॉक्टर उपस्थित थे। जिला प्रशासन की भूमिका स्पष्ट प्रशासन के अनुसार, अल्ट्राटेक सीमेंट (माणिकगढ़ सीमेंट) कंपनी को मौजा कुसुंबी एवं आसपास के 643.62 हेक्टेयर क्षेत्र में चूना पत्थर उत्खनन की अनुमति वर्ष 2031 तक दी गई है।
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इसमें से 63.62 हेक्टेयर निजी जमीन के लिए 24 आदिवासी किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है और उनके कोई मामले लंबित नहीं हैं। बांबेझरी क्षेत्र की जमीन के संबंध में किए गए सर्वेक्षण में सर्वे नंबर 43 से 48 तक कंपनी द्वारा कोई उत्खनन नहीं किए जाने की रिपोर्ट भू-अभिलेख विभाग ने दी है। साथ ही यह क्षेत्र आरक्षित वन क्षेत्र में आता है और कृषि योग्य नहीं है, ऐसा वन विभाग ने भी स्पष्ट किया है।
इस मामले में 25 सितंबर 2024, 4 दिसंबर 2024 और 17 अक्टूबर 2025 को विभिन्न स्तरों पर बैठकें आयोजित कर किसानों से संवाद किया गया। वर्तमान में यह मामला चंद्रपुर की सिविल अदालत में लंबित है, जहां अंतरिम आदेश जारी है।
साथ ही राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष भी यह मामला विचाराधीन है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मामला न्यायालय में होने के कारण कुछ प्रशासनिक सीमाएं हैं, फिर भी किसानों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए कानूनी दायरे में हर संभव सहयोग किया जाएगा। न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
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विष प्राषण की घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
पालकमंत्री डॉ. उईके ने कहा कि बांबेझरी और कुसुंबी के किसानों को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। यह घटना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसका समाधान जरूर निकाला जाएगा। अगले 8 दिनों में जिलाधिकारी स्वयं जिवती क्षेत्र में जाकर किसानों से चर्चा करेंगे। उन्होंने किसानों से अपील की कि जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए कोई भी व्यक्ति आत्मघाती कदम न उठाएं।
अस्पताल में भर्ती सभी मरीजों को बेहतर उपचार देने के निर्देश डॉक्टरों को दिए गए है। साथ ही छुट्टी के बाद सभी मरीजों को सरकारी वाहन से उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस दौरान पालकमंत्री ने जंगू पेदोर, मारुती तलांडे, जयराम कुडमेथे, बालू सिडाम और लच्छु आत्राम सहित अन्य मरीजों और उनके परिजनों से संवाद कर उनकी समस्याएं भी सुनीं।
