चंद्रपुर दीक्षाभूमि के विकास को मंजूरी, 56.90 करोड़ रुपए के विकास प्रारूप पर लगी मुहर

Dikshabhoomi Development Fund: चंद्रपुर दीक्षाभूमि के विकास के लिए राज्य सरकार ने 56 करोड़ 90 लाख रुपए से अधिक के विकास प्रारूप को मंजूरी दी है। परिसर में बुद्धविहार और सौंदर्यीकरण के कार्य होंगे।
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चंद्रपुर दीक्षाभूमि विकास (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Chandrapur Dikshabhoomi Development: ऐतिहासिक एवं पवित्र चंद्रपुर दीक्षाभूमि के बहुप्रतीक्षित विकास का रास्ता अब साफ हो गया है। राज्य शासन ने दीक्षाभूमि के नियोजित विकास के लिए 56 करोड़ 90 लाख 68 हजार 453 रुपए के विकास प्रारूप को मंजूरी दी है।

इसके तहत परिसर में भव्य बुद्धविहार, भिक्षुनिवास, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का पूर्णाकृति पुतला, सौंदर्याकरण तथा नागरिक सुविधाओं का विकास किया जाएगा, यह जानकारी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मेमोरियल सोसायटी के अध्यक्ष अरुण घोटेकर ने दी। दीक्षाभूमि को पर्यटन स्थल का दर्जा प्राप्त है। प्रस्तावित विकास कार्यों के लिए विभिन्न बौद्ध एवं सामाजिक संगठनों की सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दीक्षाभूमि विहार विकास समिति का गठन किया गया है।

56 करोड़ 90 लाख की निधि से होंगे विकास कार्य

समिति में भारतीय बौद्ध महासभा, समता सैनिक दल, त्रिरत्न बौद्ध महासंघ, बानाई, डॉक्टर, पत्रकार, प्राध्यापक, वकील, महिला प्रतिनिधि तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित कुल 32 सदस्य शामिल हैं। अरुण घोटेकर ने बताया कि भव्य बुद्धविहार के निर्माण के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग तथा नागपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज के विशेषज्ञ दल ने दीक्षाभूमि परिसर का निरीक्षण किया है।

विशेषज्ञों की तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर आगे के निर्माण एवं विकास कार्यों की दिशा तय की जाएगी। इस अवसर पर अशोक घोटेकर, नगरसेवक एड. राहुल घोटेकर, बौद्ध महासभा के नेताजी भरणे, वंचित बहुजन आघाड़ी की तनुजा रायपूरे, प्रा. रवि कांबले, राकेश वनकर और अनु दहेगावकर उपस्थित थे।

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शासकीय प्रक्रिया के तहत खर्च होगा निधि

वर्तमान विहार को हटाया जाएगा अथवा उसमें आवश्यक बदलाव किए जाएंगे, इसका निर्णय भी तकनीकी अध्ययन के बाद लिया जाएगा। दीक्षाभूमि के सभी विकास कार्य सामाजिक न्याय विभाग के मार्गदर्शन तथा सार्वजनिक निर्माण विभाग की प्रशासनिक एवं तकनीकी निगरानी में चरणबद्ध तरीके से किए जाएंगे। घोटेकर ने स्पष्ट किया कि मंजूर निधि सीधे संस्था के खाते में जमा नहीं होगी, बल्कि निर्धारित शासकीय प्रक्रिया के तहत विकास कार्यों पर खर्च की जाएगी।