चंद्रपुर में सांसों पर संकट: जनवरी के 31 में से 30 दिन रही ‘जहरीली’ हवा! जानें क्या कहते हैं आंकड़े
Chandrapur AQI: चंद्रपुर में जनवरी के 31 में से 30 दिन प्रदूषित रहे। पीएम 10 और कचरा जलाने से वायु गुणवत्ता बिगड़ी है। विशेषज्ञों ने दमा और हृदय रोगों के खतरे के प्रति आगाह किया है।
- Written By: आकाश मसने
चंद्रपुर में वायु प्रदूषण (सोर्स: सोशल मीडिया)
Chandrapur Air Pollution Report: चंद्रपुर शहर में नए वर्ष के पहले ही महीने में वायु प्रदूषण चिंताजनक स्तर पर दर्ज किया गया। जनवरी माह के 31 दिनों में से 30 दिन प्रदूषित श्रेणी में रहे, जबकि केवल 1 दिन ही वायु गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। पर्यावरण व जलवायु अध्ययनकर्ता प्रा। सुरेश चोपने ने जानकारी देते हुए बताया कि ठंड का प्रभाव बढ़ने, वाहनों की संख्या, कचरा जलाने और बायोमास बर्निंग के कारण धूलकणों की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है। 0–50 एक्यूआई (AQI) स्तर को स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है, परंतु जनवरी में ऐसा एक भी दिन नहीं मिला। 51–100 एक्यूआई को संतोषजनक श्रेणी कहा जाता है, जिसमें केवल 1 दिन दर्ज हुआ। 101–200 एक्यूआई सामान्य प्रदूषित श्रेणी है, जिसमें 30 दिन शामिल रहे। 201–300 एक्यूआई अधिक प्रदूषित माना जाता है, लेकिन इस श्रेणी का कोई दिन दर्ज नहीं हुआ।
वायु गुणवत्ता सूचकांक निकालने के लिए 3 से 8 प्रदूषकों का मान लिया जाता है। इनमें पीएम 10, पीएम 2.5, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, अमोनिया और सीसा शामिल हैं। जनवरी में पीएम 10 धूलकण 29 दिनों तक प्रमुख रहे, पीएम 2.5 एक दिन और कार्बन मोनोऑक्साइड भी एक दिन दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट होता है कि धूल, कचरा जलाने और वाहनों के धुएं से शहर में प्रदूषण बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों में प्रदूषण हर वर्ष बढ़ता है क्योंकि ठंड और धीमी हवाओं के कारण प्रदूषक हवा में फैलने के बजाय एक ही स्थान पर जमा हो जाते हैं।
गंभीर रोगों का खतरा
पहले सर्दी का मौसम स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता था, लेकिन अब बढ़ते प्रदूषण के कारण यह खतरनाक बनता जा रहा है। दमा, ब्रोंकाइटिस, टीबी, हृदय रोग तथा मानसिक रोगों में वृद्धि हो सकती है। पहले औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण अधिक होता था, पर अब महाराष्ट्र के लगभग सभी जिलों में यह समस्या बढ़ती जा रही है।
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प्रदूषण के प्रमुख कारण
थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, घरेलू कोयला जलाना, बढ़ते वाहन, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों की धूल, कचरा जलाना, निर्माण कार्य और स्थानीय उद्योग, इन सभी कारणों से प्रदूषण तेजी से बढ़ा है। शहरों में विकास कार्य, सड़क निर्माण और वाहनों की संख्या बढ़ने से धूल व धुएं का स्तर लगातार बढ़ रहा है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आंकड़ों से भी यही स्थिति सामने आती है।
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प्रदूषण नियंत्रण जरुरी
पर्यावरण अध्ययनकर्ता सुरेश चोपने ने बताया कि वृक्षों की संख्या बढ़ाना, शहरों में साइकिल उपयोग को प्रोत्साहन, सार्वजनिक परिवहन का अधिक इस्तेमाल और बैटरी चालित वाहनों को बढ़ावा देना आवश्यक है। वाहनों की संख्या कम करना, कचरा न जलाना और उद्योगों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण उपाय अपनाना जरूरी है। स्मॉग टॉवर, फॉग मशीन और कृत्रिम वर्षा जैसे उपाय अस्थायी हैं। प्रशासन द्वारा कड़े कदम उठाए जाने पर ही प्रदूषण पर नियंत्रण संभव है।
