चंद्रपुर की बड़ी जीत! 10 दिन बाद खत्म हुआ बंडू धोतरे का अनशन, लोहारडोंगरी खदान परियोजना स्थगित
Bandu Dhotre Eco-Pro Chandrapur: बंडू धोतरे का 10 दिवसीय अनशन समाप्त। लोहारडोंगरी लौह खदान परियोजना पर लगी रोक। पालकमंत्री डॉ. अशोक उइके ने नारियल पानी पिलाकर तुड़वाया अनशन।
- Written By: प्रिया जैस
बंडू धोतरे का अनशन खत्म (सौजन्य-नवभारत)
Lohardongri Iron Mine Stay: चंद्रपुर में लोहारडोंगरी लौह खदान परियोजना को लेकर चल रहा इको-प्रो संस्था के अध्यक्ष बंडू धोतरे का अन्नत्याग सत्याग्रह शनिवार की सुबह समाप्त हो गया। जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने पिछले 10 दिनों से जारी अनशन को जिला पालकमंत्री डॉ. अशोक उइके ने बंडू धोतरे को नारियल पानी पिलाकर समाप्त कराया। सरकार की ओर से लोहारडोंगरी लौह खदान परियोजना की वन्यजीव संबंधी अनुमति रद्द करने की दिशा में कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिलने के बाद यह अनशन समाप्त किया गया।
परियोजना स्थगित की गई
इस अवसर पर विधायक किशोर जोरगेवार , जिलाधिकारी विनय गौड़ा, मुख्य वनसंरक्षक एन. रामनुजम तथा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह भी उपस्थित थे। इस दौरान शासन की ओर से भेजा गया पत्र भी पढ़कर सुनाया गया।
महाराष्ट्र शासन के राजस्व व वन विभाग की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 6 जनवरी 2026 को राज्य वन्यजीव मंडल की बैठक में उक्त खदान परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव मंडल को कुछ शर्तों के साथ भेजने की सिफारिश की गई थी। हालांकि अब इस परियोजना से संबंधित आगे की कार्रवाई को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। साथ ही आंदोलन की मांग के अनुरूप लोहारडोंगरी लौह खदान परियोजना को दी गई वन्यजीव संबंधी सिफारिश को रद्द करने पर अगली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
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वन मंत्री के साथ होगी बैठक
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि क्षेत्र में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए आंदोलनकारियों द्वारा उठाई गई विभिन्न मांगों पर चर्चा के लिए वन मंत्री के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। अनशन समाप्त होने के बाद प्रतिक्रिया देते हुए बंडू धोतरे ने कहा कि आंदोलन की मांगें जिले में वन और वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
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यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था तक सीमित न रहकर जनआंदोलन बन गया था, इसलिए सरकार को इसकी गंभीरता से दखल लेनी पड़ी। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की असली ताकत चंद्रपुर की जनता रही। इसमें विभिन्न संस्थाओं, संगठनों, राजनीतिक दलों के साथ-साथ विद्यार्थियों, युवाओं और महिलाओं का भी उत्साहजनक सहभाग रहा, जिसकी वजह से आंदोलन को सफलता मिली।
