नागपुर चिंतन परिषद में बडोले की चेतावनी, ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति से रहें सावधान; सामाजिक एकता पर जोर
Nagpur Event Rajkumar Badole: नागपुर में जातीय उपवर्गीकरण चिंतन परिषद में विधायक राजकुमार बडोले ने समाज को बांटने की साजिश से सतर्क रहने की अपील करते हुए सामाजिक एकता बनाए रखने पर जोर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
जातीय उपवर्गीकरण, राजकुमार बडोले,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Maharashtra Politics Nagpur Event: नागपुर समाज में फूट डालकर जाति को वर्गीकृत करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। इससे जिन जातियों में उपवर्गीकरण होने जा रहा है उन्हें अभी से सतर्क हो जाना चाहिए, अन्यथा भविष्य में ‘अब पछताय होत क्या जब चिड़ियों चुग गई खेत’ की कहावत चरितार्थ हो जाएगी।
सिटी में आयोजित ‘राज्य स्तरीय जातीय उपवर्गीकरण चिंतन परिषद’ में राज्य के पूर्व सामाजिक न्याय मंत्री और विधायक राजकुमार बडोले ने समाज को फूट डालो और राज करो की नीति के खिलाफ आगाह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जातीय उपवर्गीकरण के नाम पर समाज में दीवारें खड़ी करने और फूट डालने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि सत्ता में बैठीं कुछ ताकते यह कारस्थानी कर रही हैं जिसे पहचान कर सामाजिक सौहार्द्र भाईचारा और एकता बनाए रखने की आवश्यकता है।
निजीकरण से आरक्षण पर मंडराता खतरा
विधायक बडोले ने समाज की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारी ताकत विघटन में नहीं बल्कि संगठित रहने में है। उनका मानना था कि राजनीतिक मतभेद हो सकते हैं लेकिन सामाजिक मतभेद समाज को तोड़ते हैं जिसका फायदा हमेशा शोषक वर्ग को होता है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि आबादी के अनुपात में फंड नहीं दिया जा रहा है, निजीकरण के माध्यम से आरक्षण खत्म किया जा रहा है और बची हुई चंद नौकरियों के लिए समाज को ही आपस में लड़ाया जा रहा है।
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बडोले ने याद दिलाया कि हजारों वर्षों तक समाज ने छुआछूत और बहिष्कार झेला है। आज 2 लाख नौकरियों का बैकलॉग (अनुशेष) है लेकिन सरकार इसे भरने के बजाय समाज को आपस में उलझा रही है। राज्य स्तरीय चिंतन परिषद का आयोजन ‘राजकुमार बडोले फाउंडेशन’ और ‘लहू सेना’ द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर महार, मातंग, चर्मकार और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने भारी संख्या में हिस्सा लिया।
13 प्रतिशत के पूरे हक के लिए हो संघर्ष
बडोले ने जोर देकर कहा कि आज हमें 1.5% हिस्सा भी ठीक से नहीं मिल रहा है। इसलिए यह लड़ाई आपस में नहीं बल्कि हमारी पूरी 13% हिस्सेदारी के लिए होनी चाहिए। यदि पूरा हिस्सा मिल जाए तो कोई भी उपजाति का युवा बेरोजगार नहीं रहेगा और हर घर में शिक्षा और सम्मान पहुंचेगा, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सरकार उपवर्गीकरण करना ही चाहती है तो यह 2027 की जनगणना के आधार के बिना नहीं होना चाहिए।
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बदर समिति और बार्टी की रिपोर्ट पर सवाल
सम्मेलन में बदर समित्ति की कार्यप्रणाली को असंवैधानिक बताते हुए प्रा. संदेश वाघ ने कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 338(9) के अनुसार अनुसूचित जातियों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर राज्य के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग’ से सलाह लेना अनिवार्य है। वहीं प्रा. मुकेश दुपारे ने बार्टी द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट को झूठा और बदनाम करने वाला बताया और जानकारी दी कि उन्होंने मुख्यमंत्री से इसकी शिकायत की है।
