Buldhana News: जलगाव जामोद में सड़क के अभाव से गर्भवती महिला की मौत, आदिवासियों का प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन

Buldhana Tribal Protest: बुलढाणा के जलगाव जामोद तहसील में सड़क के अभाव में गर्भवती महिला की मौत के बाद 550 से अधिक आदिवासी ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
jalgaon jamod road lack pregnant woman death tribal protest
जलगाव जामोद सड़क समस्या (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Jalgaon Jamod Pregnant Woman Death: बुलढाणा जिले की जलगाव जामोद तहसील के दुर्गम आदिवासी बहुल गोमाल और चालिस टापरी गांव के नागरिकों ने मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री सड़क योजना के तहत भिंगारा से गोमाल (5.25 किमी) मार्ग के निर्माण के लिए 775.84 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई थी, जिसका भूमिपूजन जलगाव जामोद के विधायक डॉ. संजय कुटे की पत्नी अपर्णा कुटे के हाथों 11 अक्टूबर 2024 को बड़े धूमधाम से संपन्न हुआ था। ठेकेदार को यह कार्य 10 अक्टूबर 2026 तक पूरा करना था।

परंतु, काम पूरा होने की अंतिम समय-सीमा करीब आने के बावजूद उद्घाटन के अलावा मौके पर एक भी नया काम नहीं हुआ। ठेकेदार और संबंधित विभागीय अधिकारियों की इस घोर लापरवाही का खामियाजा अंततः एक निर्दोष गर्भवती महिला को अपनी जान देकर भुगतना पड़ा।

आदिवासियों का आक्रोश

गत 23 अगस्त 2026 को गोमाल की निवासी गर्भवती महिला सादुरी राधेश्याम खरात को खेत में काम करते समय सर्पदंश (सांप के काटने) की घटना घटी। स्वतंत्रता के 80 वर्षों बाद भी गांव तक जाने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं होने के कारण, ग्रामीणों ने अत्यंत लाचार स्थिति में महिला को बांस की झोली में लादकर पैदल ही अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया। लेकिन समय पर इलाज न मिलने और सड़क की कमी के कारण रास्ते में ही उस गर्भवती महिला तथा उसके पेट में पल रहे मासूम बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। इससे पहले भी इस सड़क के अभाव के कारण इसी गांव में तीन छोटे मासूम बच्चों की इलाज के बिना असमय मृत्यु हो चुकी है। बावजूद इसके, प्रशासन की नींद नहीं टूटी और आदिवासियों की अनदेखी जारी रही।

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गोमाल गांव में सड़क की मांग तेज

इस हृदयविदारक घटना से क्षुब्ध होकर गोमाल और चालीस तापरी के लगभग 550 से 600 आदिवासी ग्रामीणों तथा नागरिकों ने एकजुट होकर तहसीलदार और उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) जलगाव जामोद के माध्यम से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक संयुक्त लिखित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में ग्रामीणों ने संबंधित ठेकेदार 'मे. शांति कंस्ट्रक्शन जी.एच. खंडेलवाल', 'मे. मंगलम इंफ्रा (जे.वी.) अकोला' और 'कार्यकारी अभियंता प्र.ग्रा.स.यो. म.ग्रा.र.वि. संस्था बुलढाणा' के खिलाफ गंभीर लापरवाही से मौत का आपराधिक मामला दर्ज करने की पुरजोर मांग की है। साथ ही पीड़ित खरात परिवार को 15 दिनों के भीतर उचित आर्थिक मुआवजा देने की मांग की गई है।

गर्भवती महिला की मौत के बाद CM को ज्ञापन

ज्ञापन में ग्रामीणों ने अपनी अन्य ज्वलंत समस्याओं को उजागर करते हुए बताया कि 2000 से अधिक आबादी वाले इस गांव में आज तक बिजली की सुविधा नहीं पहुंच पाई है, जिससे लोग अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। गांव के जिला परिषद स्कूल में 10 वीं तक की कक्षाएं तो हैं, लेकिन बिजली न होने से बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। इसके अलावा, पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र होने के कारण आपातकालीन स्थितियों में मरीजों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एक समर्पित एम्बुलेंस सुविधा तत्काल उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है।

550 से अधिक आदिवासी सहभागी

ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी न्यायसंगत मांगों को पूरा नहीं किया गया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बुलढाणा जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ अनिश्चितकालीन आमरण अनशन पर बैठने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार और स्थानीय प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपते समय सैकड़ों आदिवासी पुरुषों और महिलाओं के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नेता स्वाति वाकेकर, भा. रा. कां. पार्टी के तालुका अध्यक्ष भाऊराव भालेराव, अधिवक्ता और भा. रा. कां. शहर अध्यक्ष अमर पाचपोर सहित कई लोग उपस्थित थे।

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