खुदाई के दौरान मिली भगवान विष्णु और लक्ष्मी की भव्य मूर्ति (सोर्स: सोशल मीडिया)
बुलढाणा: बुलढाणा जिले के सिंदखेड राजा में राजा लाखोजी जाधव की समाधि क्षेत्र में भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा उत्खनन और संरक्षण कार्य चल रहा है। खुदाई के दौरान भगवान विष्णु और लक्ष्मी की 11वीं सदी की एक भव्य मूर्ति मिली है। इस पूरी मूर्ति में समुद्र मंथन का दृश्य बहुत ही साफ-सुथरे और नक्काशीदार तरीके से दर्शाया गया है। इसमें भगवान विष्णु शेषनाग पर बैठे हैं और लक्ष्मी उनके चरणों में बैठी हैं। चूंकि मूर्ति छह फीट लंबी और तीन फीट ऊंची और बहुत विशाल और भारी है।
ग्रामीणों की मांग है कि यह बेहद खूबसूरत मूर्ति है और यह यहां की धरोहर है इसलिए सरकार इस मूर्ति को साढ़े तीन करोड़ रुपये की लागत से बने संग्रहालय में संरक्षण के लिए रखे। इस क्षेत्र की खुदाई के इतिहास में कहा जाता है कि यह मूर्ति अत्यंत सुंदर एवं शोभायमान है।
सिंदखेड राजा में खुदाई कर मूर्ति निकालते हुए। (सोर्स: एक्स@VedveerArya3)
पूरी मूर्ति एक ही पौराणिक पत्थर पर उकेरी गई है। विष्णु को देवी लक्ष्मी के साथ शेषनाग पर लेटे हुए दिखाया गया है। मूर्ति में विष्णु के सिर के पिछले हिस्से पर दशावतार भी दर्शाया गया है। उनमें से बुद्ध को दशावतार के रूप में दिखाया गया है। सागरमंथन का सबसे सुंदर चित्रण कई दुर्लभ विशेषताओं को दर्शाता है। ब्रह्मा को कमल पर बैठे हुए मंदार पर्वत के बीच में दिखाया गया है। सर्प के सिर को एक असुर ने पकड़ा हुआ दिखाया है। जबकि, दूसरी तरफ विष्णु, गणेश, कार्तिकेय, इंद्र सहित विभिन्न सुरों को चार हाथों में उनके गुणों को पकड़े हुए और सर्प की पूंछ पकड़े हुए दिखाया गया है। पैरों में गरुड़ को हाथ जोड़े हुए दिखाया गया है।
सिंदखेड राजा में खुदाई कर मूर्ति निकालते हुए। (सोर्स: एक्स @AyyangarBksr)
मंथन के परिणाम यानी ऐरावत, उच्चैश्रवा और कामधेनु को ऊपर दर्शाया गया है, जबकि अन्य, चंद्र, धन्वंतरि और लक्ष्मी को नीचे दिखाया गया है जो मंथन के परिणामस्वरूप आए थे। यहां तक कि, मोहिनी को बर्तन के साथ दिखाया गया है। यह अत्यधिक अलंकृत मूर्ति विष्णु मूर्तियों की उत्कृष्ट कृतियों में से एक प्रतीत होती है।
खुदाई के दौरान मिली मूर्ति ग्यारहवीं शताब्दी की होने का अनुमान है। यह खूबसूरत और मनभावन मूर्ति को आज तक के इतिहास की सबसे खूबसूरत मूर्ति कहा जा रहा है।
सिंदखेड राजा क्षेत्र के नागरिकों ने सिंदखेड राजा में मिली मूर्ति को स्थानांतरित करने का विरोध जताया है। लोगों ने भारतीय पुरातत्व विभाग द्वारा मूर्ति हटाने पर तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी है। जिजाऊ के वंशज शिवाजी राजे जाधव ने भी मूर्ति को अन्यत्र ले जाने का विरोध किया है। इस बीच राष्ट्रवादी अजित पवार गुट के जिला अध्यक्ष नजीर काजी ने भी प्रतिमा को अन्यत्र ले जाने पर व्यापक जन आंदोलन की चेतावनी दी है।