मुंबादेवी-महालक्ष्मी मंदिर कॉरिडोर का भूमि पूजन (फोटो-नवभारत)
मुंबई: मुंबई के प्रसिद्ध महालक्ष्मी और मां मुंबादेवी मंदिर क्षेत्र का विकास उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर किया जाएगा। बीएमसी प्रशासन ने इस काम के लिए ठेकेदार का चयन कर लिया है। रविवार को महालक्ष्मी और मुंबादेवी मंदिर कॉरिडोर के काम का भूमिपूजन किया गया। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, पालकमंत्री दीपक केसरकर के निर्देशानुसार पुर्व मंत्री राज के. पुरोहित ने मुंबादेवी मंदिर परिसर में मंदिर नवीनीकरण एवं कॉरिडोर निर्माण का विधिवत पुजा अर्चना कर हर्षोल्लास के साथ भूमिपूजन किया।
इस दौरान महाराष्ट्र सरकार प्रशासन एवं बीएमसी प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे। मुंबादेवी मंदिर में कॉरिडोर निर्माण के लिए 200 करोड़ रुपए की निधि महाराष्ट्र सरकार ने उपलब्ध करवाई है। राज पुरोहित के अथक प्रयासों एवं संघर्ष से निर्माण कार्य आरंभ होने जा रहा है। महालक्ष्मी मंदिर के लिए 25 करोड़ से ज्यादा धनराशि खर्च की जाएगी।
बीएमसी प्रशासन ने एक ही ठेकेदार को दोनों मंदिरों का काम देने का निर्णय लिया है। छह महीने में इस क्षेत्र का विकास किया जाएगा। मंदिर क्षेत्र की ओर जाने वाली सड़कों का चौड़ीकरण, पार्किंग सुविधाएं, आधुनिक शौचालय आदि कार्य किए जाएंगे। महालक्ष्मी और मुंबा देवी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। हालांकि श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ वाली सड़कों, ट्रैफिक जाम, संकरी सड़कों, अनधिकृत पार्किंग आदि का सामना करना पड़ता है।
भक्तों के लिए दर्शन को आसान बनाने के उद्देश्य से बीएमसी ने राज्य सरकार की मदद से मंदिर परिसर को विकसित करने के लिए एक विशेष परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है। मंदिर क्षेत्र बीएमसी के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इसके विकास का कार्य बीएमसी द्वारा किया जाएगा।
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बीएमसी अधिकारियों के अनुसार राज्य सरकार ने मार्च में मंदिर परिसर के विकास के लिए धनराशि भी स्वीकृत कर दी है। इस प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ एक कंपनी ने टेंडर डाला था। कम से कम तीन कंपनियों द्वारा निविदाएं जमा करने की उम्मीद थी। कम रिस्पांस के चलते बीएमसी ने उसी कंपनी के चयन पर मुहर लगा दी है।
महालक्ष्मी मंदिर क्षेत्र में 22 स्टॉल हैं। इन स्टॉलों को पुनर्व्यवस्थित करने से क्षेत्र में भीड़भाड़ कम होगी। महालक्ष्मी मंदिर में नया प्रवेश द्वार होगा। मंदिर क्षेत्र में फुटपाथों को बेहतर बनाया जाएगा, ताकि पैदल यात्री आसानी से चल सके। बिजली के खंभे, आकर्षक विद्युत प्रकाश व्यवस्था और बैठने के लिए स्ट्रीट फर्नीचर लगाए जाएंगे। सड़कों और मार्गों की जानकारी देने वाले बोर्ड लगाए जाएंगे। इलाके में ज्यादा से ज्यादा हरित क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
मुंबा देवी क्षेत्र घनी आबादी वाला है। बड़ी संख्या में पार्किंग, रेहड़ी-पटरी और दुकानों के कारण मंदिर तक जाने वाली सड़कें संकरी हो गई हैं। इससे भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। मुंबा देवी क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा। इसमें मुंबा देवी मंदिर प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में आने वाले फूल विक्रेताओं के लिए स्टॉल, बैठने की व्यवस्था, हवन मंडप, पूजा के लिए अलग स्थान आदि जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। मुंबादेवी मंदिर क्षेत्र को विकसित करने के लिए एक वास्तुकार की भी नियुक्ति की गई है। एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है।
मां मुंबादेवी और महालक्ष्मी मंदिर परिसर विकास कार्य का भूमिपूजन किया गया। बाबुलनाथ मंदिर परिसर में विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया। श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर की स्वीकृत परियोजना का प्रस्तुतिकरण पेश किया गया।