भंडारा में ग्रामीणों ने फूंके चूल्हे, अधर में पुनर्वास, जलसमाधि की दी चेतावनी
Bhandara News: भंडारा जिले के कई गांवों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इससे बचने के लिए ग्रामीणवासियों ने मिलकर जिला कलेक्ट्रेट के सामने आंदोलन किया। प्रशासन को पुनर्वास नहीं तो जलसमाधि की चेतावनी दी।
- Written By: प्रिया जैस
भंडारा में ग्रामीणों का प्रदर्शन (सौजन्य-नवभारत)
Bhandara News: गोसीखुर्द परियोजना के बैकवॉटर के कारण हर साल बाढ़ का सामना कर रहे कारधा गांव के और पुनर्वास से वंचित नागरिकों ने आखिरकार जिला कलेक्ट्रेट के सामने चूल्हे जलाकर तीव्र आंदोलन छेड़ा। प्रभावितों ने चेतावनी दी कि पुनर्वास करो, नहीं तो जलसमाधि लेंगे।
इस आंदोलन में गोसीखुर्द परियोजना पीड़ित संघर्ष समिति तथा बाढ़ प्रभावित 22 गांवों के सैकड़ों नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने चूल्हे जलाकर प्रशासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया और लिखित निवेदन के माध्यम से अपनी मांगे सौंपीं।
तीन बार बाढ़, पुनर्वास अधर में
सरपंच और ग्रामीणों ने बताया कि कारधा गांव को 28 अगस्त 2020 को आई वैनगंगा नदी की बाढ़ ने बुरी तरह प्रभावित किया था, जिसमें 500–600 घरों को नुकसान हुआ। इसके बाद 10 और 15 अगस्त 2022 को फिर दो बार बाढ़ आई, जिसमें 100 से अधिक घर फिर पानी में डूबे। बारिश में घरों की दीवारों में नमी, सांप-बिच्छुओं का घरों में घुसना और जीवित रहना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
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22 गांव अधर में, प्रशासन का अनदेखापन?
पुनर्वास हेतु 22 गांवों के प्रस्ताव प्रशासन को सौंपे गए हैं। इनमें से कारधा गांव के लिए 22 मार्च 2022 को पत्राचार हुआ था। मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने दौरा कर आश्वासन भी दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामवासियों में गहरा रोष है।
पुनर्वास से पहले जलपर्यटन बंद करें
संघर्ष समिति ने अपने निवेदन में मांग की है कि, जब तक कारधा गांव का पूर्ण पुनर्वास नहीं होता, तब तक जलपर्यटन की सभी गतिविधियां रोकी जाएं। अन्यथा नागरिक घरों से बाहर न निकलकर वहीं जलसमाधि लेंगे और इसके लिए शासन जिम्मेदार होगा।
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अधिकारों के लिए आक्रामक रुख
अपने हक के लिए डटे आंदोलनकारी दिनभर लिखित आश्वासन की मांग पर जिला कार्यालय के सामने डटे रहे। जिलाधिकारी डॉ. संजय कोलते स्वयं बाहर आकर आंदोलनकारियों से निवेदन प्राप्त किया। आंदोलन जिला परिषद सदस्य विनोद बांते के नेतृत्व में कारधा के अश्फाक खान, तुलसीदास शेंडे, शरद मेश्राम, वसंत मेश्राम, संदेश भुरे, रमेश उके, साथ ही संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष भाऊ कातोरे के नेतृत्व में डी.बी. मडामे, आशीष कांबले, अतुल राघोर्ते, अभिमन सोनवाने, नंदलाल हजारे आदि तथा सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल हुए।
इस दौरान किसी भी अनुचित घटना से बचने के लिए पुलिस का सख्त बंदोबस्त किया गया था। कारधा और अन्य 22 गांवों का तत्काल पुनर्वास करने की मांग की है। इनमें भंडारा तहसील के दवडीपार, खमारी बुट्टी, कोरंभी, तिड्डी, बेरोडी, कोथुर्णा, खापा, कारधा, कवडसी, दाभा, कोंढी, सालेबर्डी, लोहारा, करचखेडा, खैरी, जमनी, पेवठा, मुजबी, खंबाटा आदि, पवनी तहसील के कुर्झा, इटगांव, पौना खुर्द आदि शामिल है।
