चांदपुर के वनविभाग कार्यालय में की तोडफोड़; कार्यालय रामभरोसे, कार्यालय की बिजली भी बंद
- Written By: नवभारत डेस्क
सिहोरा. संरक्षित वनक्षेत्र के ग्रीन व्हैली चांदपूर पर्यटन स्थल में वन विभाग का नवनिर्मित कार्यालय रामभरोसे होकर यहां असामाजिक तत्व द्वारा कार्यालय के दरवाजे, खिड़कियों की तोड़फोड़ कर नुकसान किया गया है. दो दिन पूर्व घटित घटना सामने आने पर वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस कार्यालय की ओर तत्काल ध्यन देने की मांग की गई है.
नागरिकों ने बताया कि शासन द्वारा लाखों रुपए खर्च कर चांदपूर में कार्यालय बनाया गया. लेकिन यहां कार्यालय में कोई भी वनपाल व वन रक्षक मौजूद नहीं रहने से कार्यालय का कारभार रामभरोसे चल रहा है.
गौरतलब है कि सिहेरा क्षेत्र में आधे से अधिक जंगल परिसर है. ऐसे में राजस्व विभाग द्वारा जंगल परिसर का हस्तांतरण वन विभाग को किया गया है, तो वहीं संरक्षित जंगल का क्षेत्र आरक्षित किया गया है. जंगल क्षेत्र के बढ़ते परिसर को देखते हुए यहां वन चौकी मजदूर करने की मांग हो रही है.
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नए से बपेरा सहायक वनरिक्षेत्र अधिकारी कार्यालय मंजूर किया गया. जिससे परिसर के हरदोली, बपेरा, कवलेवाड़ा परिसर में वन सरक्षण के लिए कार्यालय स्थापित किया गया तथा वन संपदा की संरक्षण के लिए वनपाल व वनरक्षक की डयूटी परिसर में लगाई गई. यहीं नहीं चांदपूर के जागृत श्री हनुमान देवस्थान के बाजू में वन विभाग की जगह पर लाखों रुपए खर्च कर नई इमारत का निर्माण किया गया है.
सर्वसुविधा युक्त इस इमारत के कार्यालय में अब तक बिजली की व्यवस्था नहीं की गई है. ऐसे में रात्रि के समय कार्यालय में निवासी रहते हुए वनपाल व वन रक्षकों को काफी कसरत करनी पड़ती है.
बताया जाता है कि इस इमारत का अभी तक उद्घाटन नहीं हुआ है. इसके पहले ही यहां इमारत में असामाजिक तत्व के लोगों ने डेरा डालकर कार्यालय के दरवाजे और खिड़कियों की तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया है.
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि उक्त इमारत का निर्माण कार्य निकृष्ट दरवाजे का होने से इसकी दीवारों में दरारे पड़ गई है. इस ओर संबंधित अधिकारियों को गंभीरता से ध्यान देने की मांग की जा
रही है.
रिक्त पदों की समस्या बरकरार
क्षेत्र के जंगल परिसर में वन्य जीवों का मुक्त संचार हैं. लेकिन वन विभाग की हलगर्जी के चलते जंगल क्षेत्र में वन्यजीवो का शिकार करने की घटनाएं बढ गई है. इसके लिए वन दिभाग में रिक्त प्दों का अंबर होने का प्रमुख कारण बताया जाता है. ऐसे में वन विभाग के रिक्त पदों का अनुशेष भरने के लिए प्रयास करने की जरूरत है.
