देव्हाड़ी में बंदरों का तांडव: PHC के सोलर पैनल तोड़े, लाखों का नुकसान; लोगों में दहशत
देव्हाडी क्षेत्र में बंदरों के आतंक से नागरिक परेशान हैं। बंदरों ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया है और स्थानीय व्यापारियों एवं किसानों को भी प्रभावित किया है। वन विभाग से ठोस कार्रवाई की मांग।
Devhadi Monkey Terror: तुमसर तहसील के देव्हाडी और आसपास के क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से बंदरों का जबरदस्त आतंक देखने को मिल रहा है। बंदरों के इस उपद्रव से स्थानीय नागरिक काफी परेशान हैं और पूरे इलाके में भय का वातावरण बना हुआ है। बंदर अब केवल छतों पर उधम मचाने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि घरों में घुसकर खाद्य सामग्री उठाकर ले जा रहे हैं, जिससे लोगों के दैनिक जीवन पर भी असर पड़ रहा है।
देव्हाडी के व्यस्त परिसर में बंदरों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आ रहे हैं, जिसके कारण बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। बंदरों ने अब सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
देव्हाडी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की छत पर लगाए गए सोलर पैनलों को बंदरों ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। लाखों रुपये की लागत से स्थापित यह सोलर सिस्टम टूटने से स्वास्थ्य केंद्र की बिजली व्यवस्था प्रभावित हो गई है, जिससे मरीजों और कर्मचारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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इस घटना से सरकारी संपत्ति को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। व्यापारियों और किसानों को भी नुकसानबंदरों के इस आतंक का असर स्थानीय व्यापारियों और किसानों पर भी पड़ा है। दुकानों में रखे सामान को नुकसान पहुंचाना, कच्चे मकानों की छतें तोड़ना और खेतों में घुसकर फसलों एवं फलदार पेड़ों को बर्बाद करना आम बात हो गई है।
इससे लोगों का आर्थिक संतुलन बिगड़ गया है और किसान भी काफी चिंतित हैं। इस गंभीर समस्या के बावजूद वन विभाग ध्यान नहीं दे रहा है। कई बार शिकायत करने के बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि बंदरों को पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। बंदर पकड़ योजना को लेकर असमंजसक्षेत्र में यह चर्चा भी चल रही है कि बंदरों को पकड़ने पर 500 रुपये देने की कोई योजना लागू की गई है, लेकिन वन विभाग की ओर से ऐसी किसी योजना की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
यदि ऐसी कोई योजना है तो उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए। फिलहाल, विशेषज्ञों की मदद से पिंजरे लगाकर बंदरों को पकड़ने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान कर उन्हें राहत प्रदान की जाए।
