तुमसर नगर परिषद में 12 मार्च को स्वीकृत सदस्यों का चयन, नियम टूटे तो नगराध्यक्ष पर कार्रवाई संभव

Tumsar Council Controversy: तुमसर नगर परिषद में स्वीकृत सदस्यों के चयन को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है और 12 मार्च को होने वाली प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन होने पर कारवाई होगी।
नगराध्यक्ष डिसक्वालिफिकेशन, Tumsar municipal council politics
Tumsar Local Politics (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Tumsar Municipal Council Politics: तुमसर नगर परिषद में इन दिनों स्वीकृत सदस्यों के चयन को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गरमाया हुआ है। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के बीच तीखी राजनीतिक टकराव की स्थिति बनी हुई है। नगराध्यक्ष द्वारा कथित रूप से अधिकारों के दुरुपयोग के कारण 16 जनवरी को हुए स्वीकृत सदस्यों के चुनाव को राज्य सरकार ने रद्द कर दिया था। अब यह प्रक्रिया 12 मार्च को दोबारा आयोजित की जाएगी।

हालांकि, यदि इस बार भी नियमों का उल्लंघन हुआ तो नगराध्यक्ष के खिलाफ डिसक्वालिफिकेशन (अयोग्यता) की कार्रवाई हो सकती है, ऐसी चर्चा शहर में चल रही है। सरकारी आदेश के अनुसार पार्षदों के गुटों की संख्या के आधार पर ही स्वीकृत सदस्यों का चयन किया जाना अनिवार्य है। तुमसर नगर परिषद में कुल चार गुट हैं। इनमें पहले गुट में भाजपा के 11 सदस्य, दूसरे गुट में राष्ट्रवादी कांग्रेस के 6 सदस्य, तीसरे गुट में कांग्रेस-राष्ट्रवादी गठबंधन के 5 सदस्य, जबकि चौथे गुट में केवल 4 सदस्य हैं।

अधिकारों का खुला दुरुपयोग

नियमों के अनुसार स्वीकृत सदस्यों का चयन पहले तीन बड़े गुटों से होना अपेक्षित है। हालांकि, पिछले चुनाव में नगराध्यक्ष ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए चौथे छोटे गुट से अपनी पसंद के व्यक्ति को मौका दिया था। इसी कारण राज्य सरकार ने इसे अधिकारों का खुला दुरुपयोग मानते हुए पूरी प्रक्रिया रद्द कर दी थी।

जारी है वर्चस्व की लड़ाई

बताया जाता है कि स्थानीय विधायक राजू कारेमोरे के समर्थन से नगराध्यक्ष अपनी इच्छानुसार निर्णय ले रहे हैं। हालांकि संकेत मिल रहे हैं कि ऐसा रवैया उनके लिए महंगा साबित हो सकता है। दूसरी ओर विधायक परिणय फुके भी नियमों के पालन के लिए सक्रिय हो गए हैं। ऐसे में शहर में एक बार फिर कारेमोरे बनाम फुके के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।

क्या हुआ कानून का उल्लंघन?

नगराध्यक्ष ने नगर परिषद में नियमों के बजाय अपनी मर्जी को प्राथमिकता देकर इस मुद्दे को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यदि 12 मार्च को होने वाले चुनाव में भी छोटे गुट से सदस्य चुना गया, तो इसे जानबूझकर नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है।

ऐसी स्थिति में नगराध्यक्ष के खिलाफ सीधी अयोग्यता (डिसक्वालिफिकेशन) की कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अब नगरवासियों की नजर 12 मार्च की प्रक्रिया पर टिकी हुई है। देखना होगा कि नगराध्यक्ष नियमों का पालन करते हैं या फिर वही गलती दोहराकर अपनी कुर्सी खतरे में डालते हैं।

संख्या बल का महत्व : कारेमोरे

इस संदर्भ में पूर्व नगराध्यक्ष अभिषेक कारेमोरे ने कहा कि सत्ता का दुरुपयोग और नियमों का उल्लंघन अधिक समय तक नहीं चलता। लोकतंत्र में संख्या बल का महत्व होता है, व्यक्तिगत इच्छा का नहीं।

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