दो वर्षों से धन को तरस रही ठक्कर बाप्पा योजना, आदिवासी बस्तियों के समग्र विकास पर असर

Thakkar Bappa Yojana: भंडारा जिले में ठक्कर बाप्पा आदिवासी बस्ती सुधार योजना को पिछले दो वर्षों से निधि नहीं मिलने के कारण सड़कों, समाज भवन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास प्रभावित हुआ है।
Tribal Development Scheme
Thakkar Bappa Yojana :भंडारा जिले में ठक्कर बाप्पा आदिवासी बस्ती सुधार योजना (सोर्सः सोशल मीडिया)
Published on
Updated on

Thakkar Bappa Yojana: ठक्कर बाप्पा आदिवासी बस्ती सुधार योजना के अंतर्गत आदिवासी क्षेत्रों में सड़क, बिजली, समाज भवन, जल निकासी और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास कार्य किए जाते हैं। हालांकि, पिछले दो वर्षों से इस योजना को कोई धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण भंडारा जिले की आदिवासी बस्तियों के समग्र विकास पर गंभीर असर पड़ा है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 में योजना के लिए किसी प्रकार का वित्तीय आवंटन नहीं किया गया। इसके चलते पहले से स्वीकृत कई विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं और वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों पर भी कोई निर्णय नहीं हो सका है।

कुल 34 विकास कार्यों को मंजूरी

वित्तीय वर्ष 2022-23 में ठक्कर बाप्पा आदिवासी बस्ती सुधार योजना के अंतर्गत जिले में कुल 34 विकास कार्यों को मंजूरी दी गई थी। इनमें से 24 कार्य पूरे किए जा सके, जबकि शेष कार्य विभिन्न कारणों से लंबित रह गए। उस वर्ष सरकार की ओर से जिले को 3 करोड़ 40 लाख रुपये की निधि उपलब्ध कराई गई थी, जिसमें से 2 करोड़ 54 लाख 25 हजार रुपये विकास कार्यों पर खर्च किए गए, जबकि 85 लाख 75 हजार रुपये शेष रह गए थे।

एक भी रुपया जारी नहीं किया

इसके बाद स्थिति और गंभीर होती चली गई। वित्तीय वर्ष 2023-24 में लगभग 9 करोड़ 18 लाख रुपये की अनुमानित लागत से 203 विकास कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी दी गई थी। इसी तरह, वित्तीय वर्ष 2024-25 में 9 करोड़ 30 लाख रुपये की लागत से 143 विकास कार्य स्वीकृत किए गए। बावजूद इसके, इन दोनों वर्षों में योजना के लिए सरकार की ओर से एक भी रुपया जारी नहीं किया गया।

सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी दिक्कतें

इन विकास कार्यों में आदिवासी पाड़ों को जोड़ने वाली आंतरिक सड़कों का निर्माण, कच्ची सड़कों का सीमेंट कंक्रीटीकरण, समाज भवन, श्मशान शेड, नाली व्यवस्था और अन्य सामुदायिक सुविधाएं शामिल हैं। निधि के अभाव में आदिवासी बस्तियों को रोजमर्रा की गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के मौसम में सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं और समाज भवनों के अभाव में सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी दिक्कतें आती हैं।

हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के अंतर्गत स्वीकृत सभी कार्य पूरे कर लिए गए हैं, जबकि 2024-25 में स्वीकृत एक भी कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।

उम्मीद है कि लंबित राशि जल्द जारी होगी

कुल मिलाकर, पिछले दो वर्षों से ठक्कर बाप्पा आदिवासी बस्ती सुधार योजना को पर्याप्त निधि न मिलने से आदिवासी क्षेत्रों का अपेक्षित विकास बाधित हुआ है। आदिवासी समाज और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि शीघ्र ही योजना के लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध कराई जाए, ताकि लंबित और स्वीकृत विकास कार्य पूरे किए जा सकें।

आदिवासी विकास विभाग, भंडारा के प्रकल्प अधिकारी दीपक कुमार हेड़ाऊ ने कहा कि “ठक्कर बाप्पा योजना के लिए जिले को पिछले दो वर्षों से निधि नहीं मिल पाई है। इसे उपलब्ध कराने के लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं और उम्मीद है कि लंबित राशि जल्द जारी होगी।”

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com