Bhandara District: परीक्षा परिणाम का मौसम अभी दूर है, लेकिन जिले के ग्रामीण इलाकों में आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए छात्र नामांकन को लेकर स्कूलों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई है. खासकर पांचवीं कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए शिक्षकों को अभिभावकों के घरघर जाकर संपर्क करना पड़ रहा है. स्कूलों में छात्र संख्या बनाए रखने की मजबूरी के कारण शिक्षकों पर दबाव बढ़ गया है. वहीं कुछ स्थानों पर अभिभावक भी इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पैसों की मांगें रखने लगे हैं.
ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय बड़ी संख्या में हाईस्कूल संचालित हैं. जनसंख्या की तुलना में माध्यमिक विद्यालयों की संख्या अधिक होने के कारण प्रत्येक स्कूल को अपने अस्तित्व के लिए पर्याप्त छात्र संख्या दिखाना आवश्यक हो गया है. नौकरी पर मंडरा रहा खतरायदि छात्र संख्या कम रहती है, तो कक्षाओं की मान्यता प्रभावित होने के साथ शिक्षकों की नौकरी पर भी संकट आ सकता है. इसी कारण चौथी कक्षा उत्तीर्ण कर पांचवीं में जाने वाले विद्यार्थियों पर सभी स्कूलों का विशेष ध्यान केंद्रित है.गर्मी की छुट्टियां शुरू होने से पहले ही शिक्षक गांव की गलियों में सक्रिय हो गए हैं. विद्यार्थियों की सूची हाथ में लेकर वे घरघर पहुंच रहे हैं और अभिभावकों को अपनी स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए समझा रहे हैं.
कई जगह शिक्षकों की ओर से अपने खर्च पर प्रवेश फॉर्म भरना, गणवेश या शैक्षणिक सामग्री देने का आश्वासन देना जैसे प्रयास भी किए जा रहे हैं.अभिभावक भी उठा रहे फायदाइस प्रतिस्पर्धा का लाभ अब कुछ अभिभावक भी उठाने लगे हैं. हम अपने बच्चे को आपकी स्कूल में भेजेंगे, लेकिन हमें क्या फायदा होगा जैसे सीधे सवाल पूछे जा रहे हैं.
कुछ स्थानों पर प्रवेश के बदले छिपे आर्थिक लेनदेन या अन्य सुविधाओं की मांग होने की चर्चा भी सामने आ रही है.आज की स्थिति यह है कि निजी शिक्षण संस्थानों में शिक्षक की नौकरी पाने के लिए उम्मीदवार प्रबंधन को लाखों रुपये की रकम देता है. इतनी बड़ी राशि खर्च कर नौकरी हासिल करने के बाद अब उसी नौकरी को बचाने के लिए विद्यार्थियों के पीछे घरघर भटकना पड़ रहा है. इससे शिक्षकों में नाराजगी और बेबसी साफ दिखाई दे रही है.एक शिक्षक ने कहा, पढ़ाने से ज्यादा ऊर्जा अब विद्यार्थियों को खोजने में खर्च हो रही है.