धान छोड़ फलोत्पादन की ओर बढ़ रहे किसान, कृषि विभाग भी इस बदलाव को प्रोत्साहित कर रहा
भंडारा जिले में किसान अब धान की खेती छोड़ फलोत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। जानें इस बदलाव के बारे में।
Bhandara District: भंडारा जिले के लाखनी तहसील में किसानों का रुझान अब पारंपरिक धान की खेती से हटकर फलोत्पादन की ओर तेजी से बढ़ रहा है. कृषि विभाग भी इस बदलाव को प्रोत्साहित कर रहा है, जिससे किसानों की आय में स्थिरता और वृद्धि सुनिश्चित की जा सके. हाल ही में केसर आम की खेती में एक महत्वपूर्ण सफलता सामने आई है, जहां मात्र 42 महीनों में पेड़ों पर फल आना शुरू हो गया है.
प्रत्येक पेड़ से किसान को प्रति पेड़ लगभग 3000 रुपये की आय प्राप्त हो सकती है. भंडारा जिले में धान मुख्य फसल के रूप में पहचाना जाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में धान उत्पादक किसानों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उत्पादन से लेकर बिक्री तक समस्याएं बनी हुई हैं. आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन के 68 हजार 600 किसानों का लगभग 20 लाख क्विंटल धान अब भी बिक्री की प्रतीक्षा में है, जिससे किसान आर्थिक संकट में फंसते जा रहे हैं.
इसी पृष्ठभूमि में फलोत्पादन किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है. फलों की मांग बढ़ी.बदलती जीवनशैली और पोषण के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते बाजार में फलों की मांग लगातार बढ़ रही है. भंडारा जिले में आम, केला, बेर, कटहल, पपीता, ड्रैगन फ्रूट और अमरूद जैसे फलों की मांग अधिक है, जिससे किसानों के लिए बेहतर आय के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, फलोत्पादन में एक एकड़ भूमि से मुख्य फसल के रूप में लगभग 2 लाख रुपये और अंतरवर्ती फसलों से करीब 1 लाख रुपये तक की आय संभव है.
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लाखनी तहसील के पालांदुर, मुंडीपार, सिंधीपार, मोरगांव, परसोडी, राजेगांव और कवडशी जैसे गांवों में किसानों ने सघन और अतिसघन पद्धति से बागवानी शुरू कर दी है. अंतरवर्ती फसलों जैसे सब्जियां, तरबूज और फूलों से उन्हें अतिरिक्त नकद आय भी प्राप्त हो रही है.
फलोत्पादन के लिए 80 प्रतिशत तक अनुदान
सरकार की ओर से भी फलोत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कृषि उपकरणों और संसाधनों पर 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है. इजराइल पद्धति के तहत ऊंची क्यारियों और ड्रिप सिंचाई टपक सिंचन का उपयोग कर बागवानी को अधिक लाभकारी बनाया जा रहा है. इससे शुरुआती वर्षों में अंतरवर्ती फसलों से आय मिलती है, जबकि चार वर्षों के बाद बाग से नियमित और बढ़ती हुई आय सुनिश्चित होती है.
आर्थिक स्थिति मजबूत होगी
साकोली उपविभागीय कृषि अधिकारीकिशोर पात्रीकर ने कहा कि किसान यदि पारंपरिक धान खेती के साथ-साथ फलोत्पादन को अपनाएं, तो उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है. कृषि विभाग किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और योजनाओं का लाभ देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
