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स्कूल खुलते ही महंगाई का झटका, प्रति छात्र 3 हजार रुपये तक बढ़ा खर्च, किताबें, कॉपियां, बैग और यूनिफॉर्म महंगे
Stationery Price Hike: नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले शालेय सामग्री की कीमतों में 25 से 30 प्रतिशत तक की वृद्धि ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

Education Inflation (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Bhandara Academic Session: महंगाई ने अब आम आदमी के घर के बजट के साथसाथ बच्चों की पढ़ाईलिखाई को भी अपनी जद में ले लिया है। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने से ठीक पहले शालेय सामग्री की कीमतों में हुई 25 से 30 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी ने आम अभिभावकों की सिरदर्दी बढ़ा दी है। कापियां, किताबें, स्कूल बैग, यूनिफॉर्म और अन्य स्टेशनरी सामग्रियों के दामों में इस साल हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का वित्तीय बजट पूरी तरह चरमरा गया है।
पिछले वर्ष की तुलना में इस साल स्कूली उपयोग की सभी वस्तुएं लगभग 20 से 25 फीसदी तक महंगी हो चुकी है। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत में अभिभावकों को प्रति छात्र औसतन 1500 से 3000 रुपये तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ रहा है। वर्तमान में एक छात्र के संपूर्ण शालेय साहित्य का कुल खर्च बढ़कर 5 से 6 हजार रुपये के पार पहुंच गया है।
अभिभावकों का बिगड़ा बजट
कॉपियों और किताबों की कीमतों में जहां 15 से 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, वहीं स्कूल बैग और यूनिफॉर्म के दाम 20 से 25 प्रतिशत तक बढ गए हैं। पिछले साल तक जो स्कूल बैग बाजार में 500 से 700 रुपये में आसानी से उपलब्ध था, वह इस साल 700 से 1200 रुपये के दायरे में मिल रहा है।
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निजी स्कूलों की मनमानी, अभिभावक बेबस
निजी स्कूलों की व्यावसायिक नीति ने अभिभावकों को और अधिक परेशान कर दिया है। अभिभावकों को स्कूल की ओर से तय की गई दुकानों से ही महंगे दामों पर सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसके चलते अभिभावकों के अपने विवेक और सुविधा अनुसार सस्ती सामग्री खरीदने के अधिकार का हनन हो रहा है।
स्टेशनरी और यूनिफॉर्म की कीमतों में भारी वृद्धि
पीड़ित अभिभावक संगठनों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि वे इस बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए ठोस कदम उठाएं और नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों की मनमानी पर तुरंत अंकुश लगाएं। अभिभावक विलास मेश्राम ने बताया कि जेब पर अतिरिक्त भार दो बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना अब हमारे बजट से बाहर होता जा रहा है। हर साल किताबों और गणवेश के दाम बढ़ा दिए जाते हैं। ऊपर से स्कूल प्रशासन की ओर से एक ही तय दुकान से सामग्री लेने की सख्ती की जाती है, जिसके कारण जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है।
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शैक्षिक सामग्री की कीमतों में 30% तक उछाल
गृहिणी व अभिभावक सुजाता टेकाम ने कहा किघर चलाना मुश्किल एक तरफ ईंधन और रसोई गैस सहित रोजाना की जीवन रक्षक वस्तुएं महंगी हो चुकी हैं, तो दूसरी तरफ पढ़ाई का खर्च भी आसमान छू रहा है। अगर हमारे मासिक वेतन का एक बड़ा हिस्सा बच्चों की सिर्फ स्टेशनरी में ही खर्च हो जाएगा, तो घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।
शैक्षिक सामग्री विक्रेता राजेश लांजेवार ने कहा कि हम भी मजबूरहमने जानबूझकर कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कागज और ईंधन महंगा होने से फैक्ट्रियों से ही माल ऊंचे दामों पर मिल रहा है। शैक्षिक सामग्री के दाम 15 से 20 प्रतिशत तक महंगे होने के कारण हमें भी ग्राहकों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है, पर इसमें हम भी मजबूर हैं।
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