विकास की राह देख रही सालेकसा तहसील, शिक्षा-स्वास्थ्य और सड़क सुविधाओं का गंभीर अभाव
Salekasa Development: गोंदिया जिले की सालेकसा तहसील आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों ने सरकार से विकास कार्यों में तेजी लाने की मांग की है।
Gondia Salekasa (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Tribal Area Salekasa: जिले की पूर्वी सीमा पर स्थित तथा छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की सीमा से सटी सालेकसा तहसील आज भी विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे है। अतिदुर्गम, नक्सल प्रभावित और घने जंगलों से घिरे इस आदिवासी बहुल क्षेत्र में वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। शासनप्रशासन की उपेक्षा के कारण यहां के हजारों ग्रामीण आज भी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परिवहन और कृषि सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
सालेकसा के 91 गांवों में विकास की दरकार
सालेकसा तहसील में कुल 91 गांव हैं, जहां आदिवासी आबादी लगभग 26.46 प्रतिशत है। यह क्षेत्र धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्थित कचारगढ़ गुफा, जिसे एशिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गुफाओं में गिना जाता है, आदिवासी समाज का प्रमुख आस्था केंद्र है।
प्रतिवर्ष यहां आयोजित होने वाली कोयापूनेम यात्रा में देशविदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके बावजूद पर्यटन और आधारभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। तहसील में 28 प्राथमिक विद्यालय हैं, जिनकी इमारतें तो तैयार हैं, लेकिन कई विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं।
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शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो 91 गांवों में से केवल 28 गांवों में ही प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हैं। दूरस्थ गांवों के लोगों को उपचार के लिए 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल सफर करना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर उद्योग या रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
कृषि इस क्षेत्र की मुख्य आजीविका है, लेकिन किसानों के लिए आज तक कृषि उत्पन्न बाजार समिति की स्थापना नहीं की गई है। परिणामस्वरूप किसानों को अपनी उपज औनेपौने दामों पर व्यापारियों को बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। वहीं, क्षेत्र की अधिकांश सड़कें और पुल जर्जर स्थिति में हैं।
आदिवासी क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं की कमी
कई ग्रामीण मार्गों की लंबे समय से मरम्मत नहीं हुई है। मुरकुटडोह और दंडारी मार्ग का निर्माण होने के बावजूद इन गांवों तक आज भी महाराष्ट्र राज्य परिवहन एसटी बस सेवा नहीं पहुंची है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने हेलीकॉप्टर तो देख लिए, लेकिन आज तक उनके गांव तक एसटी बस नहीं पहुंची।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अनेक बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का ध्यान इन समस्याओं की ओर आकर्षित किया गया, लेकिन अब तक ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। ग्रामीणों ने राज्य सरकार, प्रशासन, सांसद और विधायकों से मांग की है कि सालेकसा तहसील की शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, परिवहन, रोजगार और कृषि संबंधी समस्याओं का शीघ्र समाधान कर इस आदिवासी क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
