एसटी घाटे में रही तो जाएगी नौकरी! परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का कामचोर अधिकारियों को अल्टीमेटम
MSRTC Performance Audit: परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक का बड़ा फैसला। घाटे में चल रही ST बसों को लेकर कामचोर अधिकारियों को मिला 1 महीने का अल्टीमेटम, सुधरें वरना जाएगी नौकरी। पूरी खबर पढ़ें।
- Written By: गोरक्ष पोफली
प्रताप सरनाईक का आदेश (सोर्स: डिजाइन फोटो)
Transport Minister Pratap Sarnaik Ultimatum To Officials: महाराष्ट्र की जीवनरेखा मानी जाने वाली MSRTC यानी एसटी बसों की वित्तीय स्थिति को लेकर राज्य सरकार ने अब बेहद कड़ा रुख अपना लिया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एमएसआरटीसी के उन अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है जो काम में लापरवाही बरत रहे हैं और जिनकी वजह से विभाग घाटे में जा रहा है। मंत्री ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अगर अगले एक महीने में एसटी की आय में सुधार नहीं हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एसटी महामंडल की गिरती आर्थिक स्थिति और राजस्व बढ़ाने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। उन्होंने कामचोर और निष्कासन के पात्र अधिकारियों को एक महीने का अल्टीमेटम दिया है। मंत्री ने सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 30 दिनों के भीतर एसटी के राजस्व में ठोस वृद्धि और सकारात्मक परिणाम नहीं दिखे, तो संबंधित अधिकारियों का न केवल स्थानांतरण होगा, बल्कि उन्हें डिमोशन या सीधे निलंबन सस्पेंशन जैसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
21 विभाग घाटे में, आंकड़ों ने बढ़ाई सरकार की चिंता
एसटी प्रशासन की कार्यक्षमता पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि वर्तमान में राज्य के कुल 31 एसटी विभागों में से 21 विभाग भारी घाटे में चल रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अप्रैल और मई के गर्मी सीजन के दौरान, जब यात्रियों की सबसे अधिक भीड़ होती है और किराए में भी बढ़ोतरी की गई थी, तब भी एसटी के राजस्व में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस विफलता ने प्रबंधन के नियोजन और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।
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केवल दफ्तर में बैठने से काम नहीं चलेगा: सरनाईक के सख्त निर्देश
मंत्री प्रताप सरनाईक ने अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल एसी दफ्तरों में बैठकर कागजी योजनाएं बनाना और लंबी बैठकों का दौर बंद करें। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि अधिकारियों को अब जमीन पर उतरकर काम करना होगा। बस फेरों का सही नियोजन करना, गाड़ियों को निर्धारित समय पर डिपो से छोड़ना और यात्रियों को उच्च गुणवत्ता वाली सेवा देना अब उनकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। निजी वाहनों और निजी बस ऑपरेटरों के साथ मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा में एसटी को फिर से नंबर वन बनाने की जिम्मेदारी अब सीधे तौर पर अधिकारियों के कंधों पर डाल दी गई है।
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कामकाज का होगा परफॉर्मेंस ऑडिट
दी गई एक महीने की समय सीमा समाप्त होने के बाद हर डिपो, विभाग, क्षेत्रीय कार्यालय और मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के कामकाज का परफॉर्मेंस रिव्यू किया जाएगा। इस दौरान देखा जाएगा कि किस अधिकारी के क्षेत्र में आय क्यों घटी और यात्री संख्या कम होने के पीछे क्या कारण रहे। मंत्री के इस आक्रामक तेवर ने एसटी महामंडल के वरिष्ठ अधिकारियों और डिपो प्रबंधकों के बीच हड़कंप मचा दिया है।
अब अधिकारियों के पास केवल दो ही विकल्प हैं या तो वे अपनी कार्यकुशलता से एसटी को मुनाफे की पटरी पर वापस लाएं या फिर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
