Sakoli Water Crisis News: साकोली शहर में कुओं का नहीं हो रहा सदुपयोग, पानी के पारंपरिक स्रोत उदासीनता के हो रहे शिकार। साकोली, सं. ग्रीष्म ऋतु अपने शवाब की ओर अग्रसर है। बढ़ते तापमान के साथ ही लोगों को पानी की याद आने लगी है।
शहर के कुछ इलाकों में पानी की किल्लत का आभास अभी से शुरू हो गया है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, पानी की समस्या भी कुछ और बढ़ती जाएगी। इन परिस्थितियों में यदि किसी कारणवश शहर की जलापूर्ति एक दो दिन के लिए बाधित हो जाती है, तो शहर में पानी की त्राहि-त्राहि मच जाती है।
ऐसे में यदि शहर में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध पानी के पारंपरिक स्रोत कुओं का उपयोग समुचित ढंग से किया जाए, तो पानी की प्रति वर्ष रह कर उत्पन्न होने वाली समस्याओं का निराकरण हो सकता है।
साकोली सेंदुरवाफा शहर में ब्रिटिश काल के सुदृढ़, मजबूत और टिकाऊ कुएं प्रचुर मात्रा में आज भी विद्यमान हैं। किंतु स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते तथा पानी के इन पारंपरिक स्त्रोतों के प्रति सकारात्मक इच्छाशक्ति के अभाव में इन कुओं का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है।
इससे अन्य मौसमों की तरह गर्मी के मौसम में पानी घरों की टंकियों में टिक नहीं पाता है। यदि जलस्तर कम होने अथवा अन्य कारणों से जलापूर्ति नहीं हो पाने की स्थिति में पानी के लिए हाहाकार मच जाता है।
ऐसे समय कुओं से मिलने वाले पानी का उपयोग यदि वैकल्पिक रूप से किया जाए, तो शहर में पानी उपलब्धता का प्रमाण बहुत बढ़ सकता है।
अप्रैल और मई के महीने में कुएं खाली हो जाते हैं। कई वर्षों से कुओं की साफ सफाई नहीं किए जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है। इसलिए तहसील के सभी सार्वजनिक कुओं की साफ सफाई की जाए, ऐसी मांग पूर्व ज़िप सदस्य अशोक कापगते, पूर्व ज़िप सदस्य डॉ. नेपाल रंगारी, पूर्व सरपंच महादेव कापगते, पूर्व नगर सेवक हेमंत भारद्वाज, पूर्व नगर सेवक रवि परशुरामकर, मोहन लंजे आदि ने की है।