लाखांदुर में PM आवास योजना विवाद, लाभार्थी परिवार के समर्थन में आमरण अनशन
Lakhandur Hunger Strike: भंडारा जिले के लाखांदुर तहसील में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत घर को निरस्त किए जाने के विरोध में पंचायत समिति परिसर में आमरण अनशन शुरू हो गया।
PMAY Beneficiary (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Lakhandur PM Awas Yojana: लाखांदुर तहसील के गुंजेपार/किन्ही ग्रापं क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास को बिना किसी पूर्व सूचना के निरस्त किए जाने के विरोध में सोमवार 29 जून से पंचायत समिति परिसर में आमरण अनशन शुरू किया गया।
शिवसेना उद्धव बालासाहब ठाकरे के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन से पूरे क्षेत्र में हलचल मच गई है। गुंजेपार/किन्ही ग्रापं के लाभार्थी कडू देवल सोनटक्के को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर स्वीकृत हुआ था। आरोप है कि बिना किसी नोटिस या स्पष्टीकरण का अवसर दिए उनका आवास अचानक निरस्त कर दिया गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना का घर निरस्त
इस निर्णय से लाभार्थी परिवार, विशेषकर तीन अनाथ बेटियों के सामने गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। पहले से ही आर्थिक तंगी में जीवन व्यतीत कर रहे इस परिवार से सरकारी योजना का लाभ छिन जाने पर स्थानीय लोगों में भारी रोष है।
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ग्रापं की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल आंदोलनकारियों ने संबंधित ग्रामसेवक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए ग्रापं के वित्तीय लेनदेन, विकास निधि के उपयोग और अब तक हुए लेखा परीक्षण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। यह आंदोलन केवल एक लाभार्थी के आवास का मुद्दा नहीं, बल्कि ग्रापं के कथित अव्यवस्थित प्रशासन और अनियमितताओं के खिलाफ भी है।
लाखांदुर में आमरण अनशन शुरू
दोषियों पर सख्त कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी गई है। कई नागरिक हुए आंदोलन में शामिल आमरण अनशन में शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे के तहसील प्रमुख विनोद ढोरे, संजय सोनटक्के, काजल सोनटक्के, संजीवनी सोनटक्के, कोमल सोनटक्के, मंगेश प्रधान, शरद शहारे, विश्वास शहारे सहित बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।
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वहीं, रयत किसान संगठन के अध्यक्ष ज्ञानेश्वर राऊत, लोचन पारधी, गजानन दोनाडकर, मोरेश्वर तोंडरे, दिगंबर देशमुख, अश्विन सोनटक्के, मुरलीधर गिरे, सतीश बुरर्डे, लेकराम मेश्राम तथा अन्य ग्रामीणों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक लाभार्थी परिवार को न्याय नहीं मिलता और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आमरण अनशन जारी रहेगा।
