विश्व संग्रहालय दिवस: भंडारा की ऐतिहासिक धरोहर क्यों हो रही उपेक्षित? 100 कमरों वाला पांडे महल बदहाल
Bhandara Pandey Mahal: विश्व संग्रहालय दिवस पर भंडारा का ऐतिहासिक पांडे महल उपेक्षा का शिकार नजर आ रहा है। 1820 में बने इस महल को संग्रहालय में बदलने की मांग तेज हो रही है।
- Written By: अंकिता पटेल
भंडारा पांडे महल, विश्व संग्रहालय दिवस, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Bhandara Pandey Mahal Heritage Conservation: भंडारा आज विश्व संग्रहालय दिवस मनाया जा रहा है, लेकिन भंडारा शहर का ऐतिहासिक पांडे महल प्रशासनिक उपेक्षा के कारण बदहाली का सामना कर रहा है। शहर के मध्य स्थित यह भव्य इमारत संग्रहालय में परिवर्तित होने की पूरी क्षमता रखती है, फिर भी अब तक इसके संवर्धन की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
ऐतिहासिक वैभव की पहचान
सन 1820 में श्रीमंत यादवराव पांडे द्वारा निर्मित इस महल का भंडारा के इतिहास में विशेष महत्व है। भोंसले और अंग्रेजी शासनकाल में पांडे परिवार 96 गांवों के मालगुजार और सूबेदार थे। महल में 100 से अधिक कमरे हैं और इसकी वास्तुकला आकर्षक मानी जाती है। विशाल मुख्य द्वार, सागौन और शीशम के खंभे, संगमरमर के फर्श, बेल्जियम के आईने, इटालियन टाइल्स और कलात्मक नक्काशी इसकी ऐतिहासिक समृद्धि दर्शाते हैं।
रखरखाव के अभाव में जर्जर स्थिति
पांडे परिवार गणेश भक्त था और लगभग 90 वर्ष पहले यहां पीतल व बिल्लोरी कांच से सुसज्जित देवघर बनाया गया था। आज भी गणेशोत्सव के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि, रखरखाव के अभाव में महल के कई हिस्से जर्जर हो चुके हैं और बारिश में छत से पानी टपकता है।
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संग्रहालय के लिए उपयुक्त स्थान
इतिहासकारों और नागरिकों का मानना है कि जिले की प्राचीन मूर्तियां, शिलालेख और ऐतिहासिक घरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए पांडे महल सबसे उपयुक्त स्थान है। यदि इसका जीर्णोद्धार कर संग्रहालय बनाया जाए, तो इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और विद्यार्थियों को अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र उपलब्ध हो सकेगा।
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संरक्षण के लिए जल्द हस्तक्षेप करे सरकार
ग्रीन हेरिटेज यदि पुरातत्व विभाग ने तुरत ध्यान नहीं दिया, तो यह अमूल्य धरोहर हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी, सरकार से लगातार पैरवी करने के बाद भी पांडे महल को अब तक संरक्षित स्मारक का दर्जा नहीं मिल पाना बेहद अफसोसजनक है। इतिहास को जिंदा रखने के लिए शासन को तुरंत दखल देकर सुरक्षात्मक कदम उठाने चाहिए, वरना यह गौरवशाली मानबिंदु केवल इतिहास के पन्नों तक ही सीमित रह जाएगा।
-अध्यक्ष, ग्रीन हेरिटेज भंडारा, सईद शेख।
