

Bhandara Gondia Forest: नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व के एकीकृत प्रबंधन के बाद वन विभाग ने बाघों के संरक्षण और पर्यटन को वैश्विक स्तर पर विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। चंद्रपुर से बाघिनों के सफल स्थानांतरण के बाद अब बाघों के लिए शिकार की उपलब्धता बढ़ाने हेतु ताडोबा और पेंच टाइगर रिजर्व से 500 चीतल लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परियोजना में भंडारा के गडेगांव सहित चार नए प्रवेश द्वार बनाए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
टाइगर रिजर्व में वर्तमान में 17 से 19 बाघों का निवास है। इन बाघों के संरक्षण और उनके भोजन चक्र को संतुलित रखने के लिए शाकाहारी प्राणियों की संख्या बढ़ाना आवश्यक है। वर्ष 2023 में चंद्रपुर से 73 चीतल लाने का प्रयोग सफल रहा था। इसके बाद अब ताडोबा और पेंच से 500 चीतल लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए संबंधित क्षेत्रों में पिंजरे लगाकर चीतलों को पकड़ने का कार्य जारी है। वन विभाग केवल नए प्राणी लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध कराने हेतु अनुपयोगी घास हटाकर बड़े पैमाने पर घास के मैदान (ग्रासलैंड) विकसित करने की योजना बना रहा है। आगामी मानसून में घास का रोपण किया जाएगा। साथ ही वन्यजीवों के लिए जल संकट दूर करने के उद्देश्य से नए तालाब और जल संरक्षण कार्य भी किए जा रहे हैं।
राज्य सरकार द्वारा टाइगर रिजर्व का क्षेत्र बढ़ाकर 1301.883 वर्ग किलोमीटर कर दिया गया है। पर्यटकों के लिए चार नए प्रवेश द्वार बनाए जा रहे हैं, जिनमें भंडारा जिले का गडेगांव प्रमुख है, जबकि अन्य तीन प्रवेश द्वार गोंदिया जिले के पांगडी, जांभडी और गोरेगांव वन क्षेत्र में होंगे।
इन प्रयासों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कैमरा ट्रैपिंग और नियमित गश्त के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था भी मजबूत की जा रही है। उपसंचालक प्रितमसिंह कोडापे के अनुसार, इन सभी योजनाओं से भविष्य में पर्यटन विकास और रोजगार सृजन को नई गति मिलेगी।