वैनगंगा नदी का किनारा तोड़े जाने के विरोध में आमरण अनशन, गांव पर बाढ़ का खतरा
Bhandara District Protest: मोहाडी तहसील के मुंढरी बुज में रेत ठेकेदार द्वारा वैनगंगा नदी का प्राकृतिक किनारा तोड़े जाने से गांव में बाढ़ का संकट पैदा हो गया है।
Bhandara Illegal Sand Transport Route: मोहाडी तहसील के मुंढरी बुज गांव में वैनगंगा नदी के प्राकृतिक किनारे को रेत ठेकेदार द्वारा ट्रैक्टर आवागमन के लिए तोड़े जाने से गांव पर भविष्य में बाढ़ का गंभीर खतरा मंडराने लगा है। इस अवैध कृत्य के विरोध में और दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पूर्व जिला परिषद सदस्य के. बी. चौरागडे 24 अप्रैल से आमरण अनशन पर बैठे हैं। आज उनके अनशन का चौथा दिन है।
ग्रामीणों में आक्रोश, बाढ़ का खतरा बढ़ा
मुंढरी बुज गांव वैनगंगा नदी के किनारे बसा हुआ है। बारिश के समय बाढ़ आने पर श्रीकृष्ण मंदिर के पास से पानी कुंभारटोली क्षेत्र तक पहुंचता है, लेकिन नदी का प्राकृतिक ऊंचा किनारा पूर्व दिशा को सुरक्षित रखता था। आरोप है कि रेत ठेकेदार ने अपने निजी लाभ के लिए चकोले के खेत के पास इस प्राकृतिक किनारे को जेसीबी मशीन से तोड़ दिया। इस दौरान वहां मौजूद शासकीय पेड़ों को भी जड़ से उखाड़ दिया गया और मुंढरी खुर्द व सुकली घाट से रेत ढुलाई के लिए रास्ता तैयार किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि किनारा टूटने के कारण अब बारिश के मौसम में बाढ़ का पानी सीधे गांव में प्रवेश कर सकता है, जिससे मोवाड जैसी भयावह स्थिति बनने की आशंका है। करीब 10-12 वर्ष पहले आए बड़े बाढ़ के समय भी चौरागडे ने गांव की सुरक्षा के लिए दीवार बनाने की मांग की थी। अब प्राकृतिक सुरक्षा को ही नुकसान पहुंचने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
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प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
अनशनकारियों का आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारी मौके पर आने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि रेत ठेकेदार और उनके दलाल अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं और अधिकारी बिना भौगोलिक स्थिति का सही आकलन किए ठेकेदार के पक्ष में काम कर रहे हैं। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।
अनशन जारी रखने का ऐलान
रेत ठेकेदार ने अपने स्वार्थ के लिए वैनगंगा नदी का प्राकृतिक किनारा तोड़कर मुंढरी गांव को खतरे में डाल दिया है। यह सिर्फ पर्यावरण की हानि नहीं, बल्कि गांव के लिए बड़ा संकट है। बारिश में यह टूटा किनारा बाढ़ को न्योता देगा और हालात मोवाड जैसे हो सकते हैं। जब तक किनारा पूर्ववत नहीं किया जाता और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक मेरा आमरण अनशन जारी रहेगा। प्रशासन को एसी दफ्तर से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए, अन्यथा परिणामों के लिए वही जिम्मेदार होगा।
