Bhandara-Gondia MP: सांसद डॉ. प्रशांत पडोले के 2 साल बेमिसाल; संसद में 100% उपस्थिति और विकास कार्यों की झड़ी

Bhandara-Gondia MP Performance: भंडारा-गोंदिया के सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने दो वर्षों में संसद में सक्रियता और 11 करोड़ के विकास कार्यों से अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
Bhandara-Gondia MP
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स AI))
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Bhandara-Gondia MP Performance Report: किसी सांसद के चुने जाने के बाद वह लोकसभा में अपने क्षेत्र की आवाज कितनी मजबूती से उठाता है और विकास के लिए कितना निधि लाता है, इसी पर क्षेत्र का भविष्य निर्भर करता है। भंडारा-गोंदिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. प्रशांत पडोले ने पिछले 2 वर्षों में इन दोनों ही मोर्चों पर अपनी मजबूत छाप छोड़ी है। संसद में उनका अध्ययनपूर्ण कार्य, शत-प्रतिशत उपस्थिति और जिले के लंबित मुद्दों के लिए सड़क से लेकर संसद तक लड़ी गई लड़ाई के कारण उन्होंने आम जनता का विश्वास जीता है।

79 प्रश्न और 32 चर्चाओं में भागीदारी :

सांसद प्रशांत पडोले ने जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाते हुए रेल, सड़क, स्वास्थ्य और कृषि से जुड़े 79 प्रश्न संसद में उठाए। उन्होंने देश की 32 महत्वपूर्ण चर्चाओं में भाग लेकर क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से रखा। साथ ही 6 विशेष उल्लेख और 1 निजी विधेयक प्रस्तुत कर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। वर्ष 2026 के बजट सत्र में निलंबन अवधि को छोड़कर उनकी उपस्थिति 100 प्रतिशत रही।

सांसद निधि से विकास को गति

सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के तहत उन्होंने 2 वर्षों में 11 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य पूरे कराए। कुल 1106।80 लाख रुपये का निधि प्राप्त हुआ, जिसमें 127 कार्यों की योजना बनाई गई। इनमें ग्रामीण सड़कें, स्कूल कक्ष और पेयजल सुविधाएं प्रमुख हैं।

विकास कार्यों का विवरण

  • प्रस्तावित कार्यः 127 (1104.97 लाख रुपए)
  • प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त कार्यः 72 (681.57 लाख रुपए)
  • पूर्ण कार्यः 12 (80.72 लाख रुपए)

स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता

प्रधानमंत्री सहायता निधि से 18 जरूरतमंद मरीजों को लगभग 60 लाख रुपये की मदद दिलाई। पर्यावरण संरक्षण के तहत नाग नदी प्रदूषण और गोसेखुर्द बांध के दूषित पानी से मछलियों में कैंसरजन्य तत्वों के मुद्दे को राष्ट्रीय हरित अधिकरण तक उठाया।

किसानों के हित में प्रयास

किसान पुत्र होने के कारण डॉ. पडोले ने किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता दी। उनके प्रयासों से खरीद सीमा में बदलाव किया गया। धानः 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, मक्काः 55 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, इससे किसानों को उचित मूल्य मिलने का रास्ता आसान हुआ है।

लंबित परियोजनाओं पर फोकस

साकोली के भेल प्रकल्प और मोहाडी के रोहणा प्रकल्प जैसी लंबित परियोजनाओं को लेकर सांसद ने स्पष्ट किया है कि इन जमीनों पर उद्योग स्थापित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने केंद्र स्तर पर इसके लिए लगातार प्रयास जारी रखने का भरोसा दिया है। दो वर्षों में किए गए इन कार्यों के आधार पर सांसद डॉ। प्रशांत पड़ोले का कार्यकाल क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

निलंबन के दौरान भी संघर्ष जारी

2026 के सत्र में निलंबन के बावजूद डॉ. पडोले पीछे नहीं हटे। उन्होंने लोकसभा की सीढ़ियों पर बैठकर रोज प्रदर्शन किया और अपने क्षेत्र के मुद्दे उठाए। उनके इस संघर्ष की सराहना विपक्ष के नेताओं राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी की।

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