Bhandara District News: शासन की घरकुल योजना के तहत लाभार्थियों को मुफ्त रेत उपलब्ध कराने की व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोप सामने आए हैं। तहसील के कई रेत घाटों पर इस सुविधा का दुरुपयोग कर अवैध उत्खनन और बिक्री किए जाने की शिकायतें उठी हैं। मामले की पारदर्शिता के लिए ट्रैक्टरों की जीपीएस आधारित जांच की मांग तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, बेटाला, रोहा, मुंढरी, निलज और देव्हाडा (बु.) घाटों से घरकुल लाभार्थियों को 5 ब्रास रेत मुफ्त देने का प्रावधान है। लेकिन निलज, मुंढरी और देव्हाडा घाटों पर लाभार्थियों के नाम पर अन्य ट्रैक्टरों से रेत निकाले जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर कुछ राजस्व कर्मियों की अनदेखी के चलते यह अवैध गतिविधि जारी होने की चर्चा है।
मोहाडी में आयोजित जनता दरबार में आंधलगांव और अकोला क्षेत्र के रेत घाटों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। करडी ग्राम पंचायत सदस्य राजू तुमसरे ने घाटों से रेत परिवहन की तकनीकी जांच की मांग की। उन्होंने नायब तहसीलदार चांदेवार से ट्रैक्टरों की जीपीएस लोकेशन और मूवमेंट की जांच कर अवैध परिवहन का खुलासा करने की बात कही।
शिकायतों के मुताबिक, दिन में लाभार्थियों के नाम पर रेत जमा की जाती है, जबकि रात के समय पुलिस गश्त से बचते हुए टिप्परों के जरिए बाहर भेज दी जाती है। कई मामलों में लाभार्थी पहले ही निजी तौर पर रेत खरीदकर निर्माण पूरा कर चुके हैं, इसके बावजूद उनके नाम पर रेत उठाकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेची जा रही है।
हाल ही में एक स्थान पर अवैध रूप से जमा रेत जब्त कर संबंधितों पर जुर्माना लगाया गया है। हालांकि नागरिकों का कहना है कि केवल दंडात्मक कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इस पूरे नेटवर्क के पीछे शामिल मुख्य आरोपियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की जा रही है।
अब देखना होगा कि इन शिकायतों के बाद राजस्व और पुलिस प्रशासन अवैध रेत कारोबार पर किस प्रकार की ठोस कार्रवाई करता है।