

Highlights:
16 अक्टूबर को महाराष्ट्र के न्यायालयीन कर्मचारियों ने संशोधित वेतनश्रेणी की मांग पर काली पट्टी लगाकर काम किया।
अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारी मुंबई उच्च न्यायालय और उसकी खंडपीठों के कर्मचारियों के समान संशोधित वेतनश्रेणी चाहते हैं।
कर्मचारी संगठन का दावा है कि वेतनश्रेणी से संबंधित प्रस्ताव पिछले 20 महीनों से शासन स्तर पर लंबित है।
Wardha Court Employees Protest: समान काम, समान वेतन और संशोधित वेतनश्रेणी लागू करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के न्यायालयीन कर्मचारियों ने अब आंदोलन तेज कर दिया है।
मुंबई उच्च न्यायालय के कर्मचारियों को लागू वेतनश्रेणी के अनुरूप अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों को भी संशोधित वेतनश्रेणी देने की मांग पर शासन की कथित उदासीनता के विरोध में 16 को कर्मचारियों ने काली पट्टी लगाकर कामकाज किया। महाराष्ट्र राज्य न्यायालयीन कर्मचारी महासंघ के निर्देशानुसार वर्धा जिले के विभिन्न न्यायालयों के कर्मचारियों ने भी इस आंदोलन में सहभागिता दर्ज कराई।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी वेतनश्रेणी से संबंधित प्रस्ताव पिछले 20 महीनों से शासन स्तर पर लंबित है। इस अवधि में कोई ठोस निर्णय नहीं लिए जाने से कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने संशोधित वेतनश्रेणी सहित अन्य लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया, तो 17 नवंबर 2026 से राज्यभर के लगभग 34 हजार न्यायालयीन कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत कर्मचारियों को मुंबई उच्च न्यायालय और उसकी खंडपीठों के कर्मचारियों के समान संशोधित वेतनश्रेणी देने की मांग लंबे समय से की जा रही है।
इस विषय पर उच्च न्यायालय की ओर से न्यायमूर्तियों की एक विशेष समिति गठित की गई थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को प्रस्तुत कर दी है, लेकिन इसके बावजूद पिछले 20 महीनों से इस संबंध में कोई ठोस निर्णय नहीं होने का दावा कर्मचारी संगठन ने किया है। संगठन के अनुसार, समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद भी वेतनश्रेणी लागू करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने से कर्मचारियों को निराशा का सामना करना पड़ रहा है।
इसी के चलते आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने का निर्णय लिया गया है। कर्मचारियों की मांग है कि संशोधित वेतनश्रेणी तत्काल लागू की जाए और अन्य लंबित समस्याओं का भी शीघ्र निराकरण किया जाए।
आंदोलन के तहत हिंगणघाट के विभिन्न न्यायालयों के कर्मचारी प्रवेशद्वार के पास एकत्रित हुए और शासन की कार्यप्रणाली के प्रति नाराजगी व्यक्त की। इसके बाद कर्मचारियों ने काली पट्टी लगाकर अपना नियमित कामकाज जारी रखा, काली पट्टी आंदोलन के माध्यम से कर्मचारियों ने अपनी मांगों की ओर शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया।
इस आंदोलन में जिला एवं सत्र न्यायालय हिंगनघाट, दिवाणी न्यायालय वरिष्ठ स्तर हिंगनघाट, सह दिवाणी न्यायालय कनिष्ठ स्तर हिंगनघाट तथा दूसरे और तीसरे सह दिवाणी न्यायालय कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों ने सहभागिता दर्ज कराई।
महाराष्ट्र राज्य न्यायालयीन कर्मचारी संगठन ने स्पष्ट किया है कि काली पट्टी आंदोलन के बाद भी यदि शासन की ओर से सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा। इसके तहत 17 नवंबर 2026 से राज्यभर के लगभग 34 हजार न्यायालयीन कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दे चुके हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि समान काम के लिए समान वेतन की मांग न्यायसंगत है और इस पर लंबे समय तक निर्णय लंबित रखना उचित नहीं है। अब शासन इस मामले में क्या कदम उठाता है, इस पर न्यायालयीन कर्मचारियों की नजरें टिकी हुई है।