लाखनी में मनरेगा की बदहाली; 80 हजार पंजीकृत मजदूरों में से केवल 3 हजार को मिला काम, पलायन को मजबूर ग्रामीण
Lakhni News: लाखनी तहसील में 80,619 पंजीकृत मजदूरों में से केवल 3,042 को ही काम मिला है। प्रशासन की उदासीनता से ग्रामीण मजदूरों की स्थिति गंभीर हो गई है।
Bhandara News: लाखनी ग्रामीण गरीबों को साल में 100 दिन रोजगार देने की गारंटी वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) लाखनी तहसील में दम तोड़ती नजर आ रही है। पंचायत समिति प्रशासन की उदासीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां पंजीकृत 80,619 मजदूरों में से अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक केवल 3,042 मजदूरों को ही काम मिल पाया है। यह कुल संख्या का 5 प्रतिशत भी नहीं है, जिससे रोजगार उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की पोल खुल गई है।
तहसील की 71 ग्राम पंचायतों के अंतर्गत 104 गांव आते हैं, जहां जनगणना के अनुसार 17,140 परिवार गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 के लिए प्रशासन ने बड़े बजट की योजना बनाई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर केवल 44 ग्राम पंचायतों में ही 297 कार्य शुरू दिखाए गए हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 251 कार्य प्रधानमंत्री आवास (घरकुल) से जुड़े हैं और मात्र 10 कार्य वृक्षारोपण के हैं। इन कार्यों में मजदूरों की आवश्यकता सीमित होती है, जिससे आम श्रमिकों के लिए रोजगार के अवसर बेहद कम रह गए हैं।
सम्बंधित ख़बरें
15 दिनों के अंदर मांगो पर समाधान निकाले, अन्यथा करेंगे भूख हड़ताल, तुमसर नप सेवानिवृत्त कर्मियों ने दी चेतावनी
Lenskart विवाद पर भड़के नितेश राणे, बोले- कॉर्पोरेट में हिजाब-बुर्का मंजूर तो तिलक-बिंदी पर रोक क्यों?
ठाणे: महिला आरक्षण पर सरकार को घेरते नसीम खान, कांग्रेस करेगी देशव्यापी प्रदर्शन
‘मराठी’ नहीं तो मुश्किल में पड़ेंगे टैक्सी-ऑटो चालक, प्रताप सरनाईक ने बुलाई विशेषज्ञों की इमरजेंसी बैठक
आलेसुर, गुरढ़ा, कनेरी, केसलवाड़ा और मरेगांव में वृक्षारोपण कार्य चल रहे हैं, जबकि पालांदूर, परसोड़ी और सावरी में घरकुल निर्माण जारी है। इसके बावजूद भारी बजट के मुकाबले मजदूरों की बेहद कम भागीदारी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रही है।
स्थानीय मजदूरों का आरोप है कि काम की मांग के बावजूद पंचायत समिति स्तर पर टालमटोल की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
ग्राम स्तर पर निष्क्रियता, योजना प्रभावित
ग्राम पंचायत स्तर पर ग्रामसेवकों और रोजगार सहायकों की निष्क्रियता के कारण योजना का क्रियान्वयन प्रभावित हो रहा है। गटविकास अधिकारी को 25 लाख रुपये तक के कार्यों की प्रशासनिक मंजूरी का अधिकार होने के बावजूद नए कार्य शुरू करने में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं सुधरी तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
घरकुल कार्यों को प्राथमिकता
मनरेगा के तहत बड़े पैमाने पर कार्य स्वीकृत हैं। फिलहाल प्राथमिकता के आधार पर घरकुल निर्माण कार्य तेज गति से शुरू किए गए हैं। मांग के अनुसार मजदूरों को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा और अन्य विकास कार्य भी जल्द शुरू होंगे।
– संदीप पानतवने, गटविकास अधिकारी, लाखनी
प्रशासन की उदासीनता से व्यवस्था ठप
सरकार और प्रशासन की लापरवाही के कारण पूरी व्यवस्था ठप हो गई है। मनरेगा जैसी योजना होने के बावजूद मजदूरों का पलायन होना सरकार की बड़ी विफलता है। इससे मजदूरों के सामने जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है।
– योगराज झलके, तहसील कांग्रेस अध्यक्ष, लाखनी
