लाखनी में कचरा संकट गहराया: डेढ़ साल से फंड नहीं, पार्षदों ने दी खुद कचरा गाड़ियाँ चलाने की चेतावनी
Nagar Panchayat Lakhni: लाखनी नगर पंचायत में फंड की कमी से सफाई व्यवस्था ठप है। विकास कार्यों का पैसा कचरा प्रबंधन पर खर्च हो रहा है। नगरसेवकों ने मांग पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
Lakhni News: लाखनी नपं इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट और कचरा प्रबंधन की समस्या से जूझ रही है। शासन की ओर से पिछले डेढ़ वर्ष से घनकचरा प्रबंधन के लिए निधि उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण शहर की सफाई व्यवस्था वेंटिलेटर पर आ गई है।
स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि नगरसेवकों को मजबूरन अपने प्रभागों के विकास कार्यों के लिए आवंटित नगरोत्थान योजना के करीब 65 से 70 लाख रुपये कचरा उठाने और स्वच्छता बनाए रखने पर खर्च करने पड़ रहे हैं। शहर में साफसफाई, नालों की स्वच्छता और घरघर कचरा संकलन के लिए सालाना लगभग 1.40 करोड़ रुपये की जरूरत होती है। फंड के अभाव में स्वच्छता विभाग से जुड़े 38 मजदूरों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है।
बजट की कमी के चलते इन मजदूरों को महीने में केवल 15 दिन ही काम दिया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बदहाल हो गई है। विकास बनाम स्वच्छता की जंगएक ओर जहां शहर को स्वच्छ रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर विकास निधि का डाइवर्जन होने से सड़कों, नालियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं का काम ठप पड़ा है। यदि शासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर विशेष निधि जारी नहीं की, तो आने वाले दिनों में लाखनी शहर में कचरा संकट और भी भयावह रूप ले सकता है।
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हम व्यवस्था रुकने नहीं देंगेहमने जिलाधिकारी और शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया है। शहर को गंदगी से बचाने के लिए नगरसेवकों ने आपसी समन्वय से अन्य योजनाओं का पैसा स्वच्छता पर खर्च करने का कठिन निर्णय लिया है। हम व्यवस्था रुकने नहीं देंगे, लेकिन शासन को जल्द निधि देनी होगी। त्रिवेणी पोहरकर, नगराध्यक्ष
निधि नहीं मिलने से स्थिति चिंताजनक नपं के पास 4 वाहन और 38 मजदूर हैं। यदि शासन समय पर पैसा दे, तो हम 50 मजदूरों को नियमित रोजगार देकर शहर को साफ रख सकते हैं। फिलहाल निधि नहीं मिलने से स्थिति चिंताजनक है। अगर जल्द फंड नहीं मिला, तो हम नगरसेवकों को खुद कचरा गाड़ियां चलाकर सड़क पर उतरना पड़ेगा। राजेश निंबेकर, नगरसेवक एवं सभापति, स्वच्छता विभाग
शहर की छवि हो रही खराबविकास कार्यों की निधि को कचरे पर खर्च करना हमारी मजबूरी बन गई है। फ्लाईओवर के नीचे जीएमसी कंपनी की लापरवाही और पानी के अभाव में सौंदर्यीकरण खराब हो रहा है। नपं सर्विस रोड की सफाई तो कर रही है, लेकिन पुल के नीचे गंदगी का अंबार लगा है, जिससे शहर की छवि खराब हो रही है। धनु व्यास, नगरसेवक
