जांभोरा के प्रगतिशील किसान अरविंद गहाणे ने सूरजमुखी की खेती कर पारंपरिक खेती को चुनौती दी है।
Bhandara News: पारंपरिक खेती को छोड़कर आधुनिक और नगदी फसलों की ओर रुख करने से खेती किस तरह लाभदायक हो सकती है, इसका बेहतरीन उदाहरण तहसील के जांभोरा गांव के प्रगतिशील किसान अरविंद गहाणे ने पेश किया है. उन्होंने इस वर्ष अपने खेत में सूरजमुखी की खेती कर एक सफल प्रयोग किया है. वर्तमान में उनके खेत में पीलेपीले सूरजमुखी के फूल लहलहा रहे हैं, जो आसपास के किसानों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गए हैं.
क्षेत्र में जहां आमतौर पर धान, सब्जियां और गन्ने की खेती की जाती है, वहीं बदलते मौसम और अनिश्चित बारिश के कारण पारंपरिक खेती कई बार घाटे का सौदा साबित होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए गहाणे ने कम पानी और कम समय में तैयार होने वाली सूरजमुखी फसल का चयन किया. बाजार में खाद्य तेल की बढ़ती मांग और अच्छे दाम मिलने की संभावना ने उन्हें इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने वैज्ञानिक पद्धति से खेत की तैयारी कर सूरजमुखी की बुवाई की और समय पर खाद व सिंचाई का उचित प्रबंधन किया. कम लागत और कम मेहनत में अच्छी उपज देने वाली यह फसल क्षेत्र की मिट्टी में भी अच्छी तरह अनुकूल साबित हुई है. मार्च माह की बढ़ती गर्मी में भी यह फसल अच्छी तरह टिके रहने में सक्षम है. आसानी से होती बिक्री सूरजमुखी के बीजों की बिक्री बाजार और तेल मिलों में आसानी से की जा सकती है,
जिससे किसानों को बेहतर आय की उम्मीद रहती है. इसके साथ ही इसकी खली पशुओं के लिए पौष्टिक चारा भी बनती है. गहाणे का यह प्रयोग अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रहा है. उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे एक ही फसल पर निर्भर न रहकर बाजार और मौसम के अनुसार फसल परिवर्तन अपनाएं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके.