भंडारा के परियोजनाओं में महज 18.91% पानी शेष, खरीफ फसलों पर मंडराया सूखा संकट, खरीफ फसल पर सूखा संकट
Bhandara Water Crisis: भंडारा जिले में जून बीतने के बाद भी पर्याप्त बारिश न होने से जल संकट गहरा गया है। जिले की मध्यम, लघु और मालगुजारी परियोजनाओं में सामूहिक रूप से केवल 18.91 % जल भंडारण बचा है।
- Written By: केतकी मोडक
भंडारा में सूखा तालाब सोर्स- फोटो नवभरत
Bhandara Water Storage Projects: जून माह समाप्त होने के बाद भी अपेक्षित वर्षा नहीं होने से भंडारा जिले की सिंचाई परियोजनाओं में जल भंडारण चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। 1 जुलाई को जारी आधिकारिक जल भंडारण रिपोर्ट के अनुसार, जिले की 5 मध्यम परियोजनाओं, 31 लघु सिंचाई परियोजनाओं और 28 पूर्व मालगुजारी तालाबों में कुल मिलाकर केवल 23.838 दलघन मीटर (18.91 प्रतिशत) पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह भंडारण 82.032 दलघन मीटर (65.07 प्रतिशत) था। ऐसे में खरीफ सीजन की शुरुआत में ही जल संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं।
बड़े बांधों में भी अपेक्षा से कम पानी
जिले की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले गोसीखुर्द (इंदिरा सागर) और बावनथड़ी (राजीव सागर) परियोजनाओं में भी जल भंडारण संतोषजनक नहीं है। गोसीखुर्द परियोजना की कुल भंडारण क्षमता 740.17 दलघन मीटर है, जबकि वर्तमान में इसमें 255.34 दलघन मीटर (34.50 प्रतिशत) पानी उपलब्ध है।
वहीं, बावनथड़ी परियोजना की स्थिति अधिक गंभीर है। इसकी 254.69 दलघन मीटर क्षमता के मुकाबले केवल 33.86 दलघन मीटर (13.29 प्रतिशत) जल भंडारण शेष है। दोनों बड़े बांधों की कुल क्षमता 994.86 दलघन मीटर है, जबकि वर्तमान में इनमें केवल 289.20 दलघन मीटर (29.07 प्रतिशत) पानी उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है।
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मध्यम परियोजनाओं की हालत सबसे खराब
भंडारा जिले की 5 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में कुल क्षमता 47.118 दलघन मीटर के मुकाबले केवल 4.568 दलघन मीटर (9.70 प्रतिशत) पानी बचा है। पिछले वर्ष इसी अवधि में इन परियोजनाओं में 30.775 दलघन मीटर (65.31 प्रतिशत) जल भंडारण था।
28 पूर्व मालगुजारी तालाब भी सूखने की कगार पर
जिले के 28 पूर्व मालगुजारी तालाबों की कुल क्षमता 25.404 दलघन मीटर है। इनमें वर्तमान में केवल 5.630 दलघन मीटर (22.18 प्रतिशत) पानी शेष है। पिछले वर्ष इसी अवधि में इन तालाबों में 62.51 प्रतिशत जल भंडारण था। एकोड़ी, चांदोरी और आमगांव जैसे प्रमुख तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं, जबकि कई अन्य तालाबों का जलस्तर अत्यंत निम्न स्तर पर पहुंच गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की आशंका बढ़ गई है।
लघु सिंचाई परियोजनाओं में भी भारी गिरावट
जिले की 31 लघु सिंचाई परियोजनाओं की कुल क्षमता 53.542 दलघन मीटर है। वर्तमान में इनमें केवल 13.640 दलघन मीटर (25.48 प्रतिशत) पानी उपलब्ध है। पिछले वर्ष इसी समय इन परियोजनाओं में 66.07 प्रतिशत जल भंडारण था।
परियोजनावार स्थिति इस प्रकार
- चांदपुर परियोजना: 9.63 प्रतिशत
- बघेडा परियोजना: 24.64 प्रतिशत
- बेटेकर बोथली परियोजना: 25.40 प्रतिशत
- सोरणा परियोजना: 24.01 प्रतिशत
- निम्न चुलबंद परियोजना: पूरी तरह सूखी (0 प्रतिशत जल भंडारण)
कम वर्षा का सीधा असर
1 जून से 1 जुलाई के बीच बड़े बांधों के जलग्रहण क्षेत्र में औसतन केवल 16.20 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 61.90 मिमी बारिश हुई थी। कम वर्षा के कारण बांधों में अपेक्षित जल प्रवाह नहीं हो सका। फिलहाल गोसीखुर्द और बावनथड़ी दोनों परियोजनाओं से पानी का कोई विसर्ग (पानी छोड़ना) नहीं किया जा रहा है तथा सभी गेट बंद रखे गए हैं।
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खरीफ सीजन पर मंडराया संकट
जिले में जल भंडारण की वर्तमान स्थिति खरीफ फसलों के लिए चिंता का विषय बन गई है। सिंचाई की मांग बढ़ने के बीच जलाशयों में कम पानी होना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। ऐसे में उपलब्ध पानी का वैज्ञानिक एवं संतुलित प्रबंधन, पेयजल को प्राथमिकता तथा सिंचाई के लिए चरणबद्ध योजना बनाना आवश्यक हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मानसून ने रफ्तार नहीं पकड़ी, तो खेती, पेयजल आपूर्ति और सिंचाई व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है। वर्तमान परिस्थितियों में जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और पानी का मितव्ययी (किफायती) उपयोग ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
