भंडारा में हाई-वोल्टेज ड्रामा! जमीन विवाद में न्याय न मिलने पर तहसील के सामने पेड़ पर लटका किसान, मचा हड़कंप
Bhandara News: भंडारा के साकोली में जमीन अतिक्रमण और प्रशासनिक अनदेखी से तंग आकर एक किसान ने तहसील कार्यालय के सामने पेड़ पर फांसी लगाकर जान देने की कोशिश की। पुलिस ने सूझबूझ से बचाया।
पेड़ पर चढ़ा आंदोलनकारी किसान (फोटो नवभारत)
Bhandara Farmer Suicide Attempt News: भंडारा जिले की साकोली तहसील के अंतर्गत सानगडी के पास स्थित केसलवाड़ा निवासी विलास मारुति सुखदेवे, उनका बेटा सचिन सुखदेवे और उनकी पत्नी पिछले दो दिनों से तहसील कार्यालय के सामने भीषण गर्मी में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग है कि उनके मालिकाना हक की जमीन पर किया गया अतिक्रमण हटाया जाए और गट नंबर 9 की भूमि की सरकारी नापी की जाए। हालांकि, दो दिन बीत जाने के बाद भी किसी प्रशासनिक अधिकारी ने उनसे मिलने या उनकी सुध लेने की जहमत नहीं उठाई।
आंदोलनकारी ने पेड़ पर चढ़कर किया आत्महत्या का प्रयास
प्रशासन के इस उदासीन रवैये से तंग आकर आंदोलनकारी विलास सुखदेवे ने 28 मई को पंचायत समिति के सामने स्थित एक पेड़ पर चढ़कर अपने गले में नायलॉन की रस्सी बांधकर फांसी लगाने का आत्मघाती प्रयास किया। इस सनसनीखेज घटना से परिसर में हड़कंप मच गया और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जैसे ही विलास सुखदेवे ने पेड़ की टहनी से रस्सी बांधकर खुद को लटकाने की कोशिश की, वहां मौजूद लोगों ने तुरंत भंडारा पुलिस को इसकी सूचना दी। जानकारी मिलते ही साकोली पुलिस थाने के थानेदार महादेव आचरेकर अपने दल-बल के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे।
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इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद वंचित बहुजन आघाड़ी के जिला महासचिव डी. जी. रंगारी, सामाजिक कार्यकर्ता अचल मेश्राम और पंचायत समिति सदस्य कृष्णा कोयाडवार ने तुरंत मामले में हस्तक्षेप किया। उन्होंने पेड़ पर चढ़े विलास सुखदेवे से नीचे उतरने का अनुरोध किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि वे इस मांग को लेकर प्रशासन से बात करेंगे और पूरी तरह उनके साथ खड़े हैं। पुलिस अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सूझबूझ और समझाने-बुझाने के बाद उन्हें सुरक्षित नीचे उतारा गया, जिससे एक बड़ा अनर्थ टल गया।
अनदेखी के कारण उठाया आत्मघाती कदम
विलास सुखदेवे के परिवार का आरोप है कि उनकी निजी जमीन पर सरकारी स्तर पर अतिक्रमण किया गया है। अपनी जायज जमीन की नापी कराने के लिए वे लगातार सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे। जब कहीं से न्याय नहीं मिला, तो हार मानकर उन्होंने सपरिवार तहसील कार्यालय के सामने आंदोलन का रास्ता चुना। भीषण गर्मी में पूरा परिवार अनशन पर बैठा था, लेकिन प्रशासन ने संवेदनहीनता दिखाई। स्थानीय नागरिकों में चर्चा है कि प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ही पीड़ित को यह जानलेवा कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
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पुलिस ने दिया जमीन नापने का आश्वासन
हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद थानेदार आचरेकर ने खुद पहल की और पीड़ित परिवार की जमीन नापने के संबंध में प्रशासनिक स्तर पर उचित समाधान निकालने का ठोस आश्वासन दिया। इस आश्वासन के बाद ही परिसर का तनाव शांत हो सका। अब केसलवाड़ा के ग्रामीणों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग इस जमीन की नापी की प्रक्रिया कब शुरू करता है।
