भंडारा में गेल गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट से किसान परेशान: अधिग्रहित से अधिक जमीन खोदने का आरोप, 30% खेती प्रभावित
Bhandara Bijepar News: भंडारा के बिजेपार में गेल की गैस पाइपलाइन के कारण किसानों की 30% भूमि परती रह गई। तय सीमा से अधिक जमीन की खुदाई और मेड़ टूटने से नाराज किसानों ने मुआवजे की मांग की।
- Written By: रूपम सिंह
गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Bhandara GAIL Gas Pipeline: भारत सरकार के उपक्रम गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा भंडारा तहसील के बिजेपार क्षेत्र में गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य जारी है। इस बीच स्थानीय किसानों ने आरोप लगाया है कि परियोजना के दौरान अधिग्रहित 20 मीटर चौड़ी भूमि से अधिक क्षेत्र का उपयोग कर खेतों की खुदाई की जा रही है। किसानों का कहना है कि इससे उनकी कृषि भूमि को नुकसान पहुंचा है और खेती करना मुश्किल हो गया है।
अधिग्रहण से अधिक भूमि उपयोग का आरोप
जानकारी के अनुसार, कंपनी ने गैस पाइपलाइन के लिए 20 मीटर चौड़ी भूमि का अधिग्रहण कर प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया है। हालांकि किसानों का दावा है कि वास्तविक निर्माण कार्य के दौरान अधिग्रहित क्षेत्र से दोगुने-तिगुने हिस्से का उपयोग किया जा रहा है। इससे धान सहित अन्य फसलों की खेती योग्य भूमि प्रभावित हो रही है और किसानों की आय पर भी असर पड़ने की आशंका है।
खेतों की मेड़ें और फसल को हुआ नुकसान
भंडारा किसानों के अनुसार, पाइपलाइन बिछाने में इस्तेमाल की जा रही भारी मशीनों से खेतों की मेड़ें टूट गई हैं और धान की फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों के बीच गहरी खुदाई और दोनों ओर मिट्टी के बड़े-बड़े ढेर जमा होने से कई स्थानों पर जमीन अस्थायी रूप से खेती के लिए अनुपयोगी हो गई है।
सम्बंधित ख़बरें
गडचिरोली में 156 जर्जर मकानों पर मंडराया खतरा, नप की नोटिस के बाद भी खाली नहीं कर रहे लोग, होगी FIR
संभाजीनगर में पानी संकट: 2,740 करोड़ की नई जलापूर्ति योजना फिर ठप, बटरफ्लाई वाल्व बना बाधा
जीरो फेटेलिटी अभियान: छत्रपति संभाजीनगर में ट्रैफिक पुलिस का बड़ा एक्शन, 1,363 वाहन चालकों का कटा चालान
छत्रपति संभाजीनगर की बदल जाएगी सूरत! सड़कों के चौड़ीकरण के लिए CM फडणवीस से 1510 करोड़ रुपए की भारी-भरकम मांग
कृषि कार्य में बढ़ी मुश्किलें
पाइपलाइन बिछाने के लिए बनाई गई नालियों को समय पर नहीं भरे जाने से कई खेत दो हिस्सों में बंट गए हैं। इससे ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि इसी कारण इस खरीफ सीजन में उनकी लगभग 30 प्रतिशत कृषि भूमि पर खेती नहीं हो सकी और जमीन परती रह गई।
यह भी पढ़ें:- संभाजीनगर में पानी संकट: 2,740 करोड़ की नई जलापूर्ति योजना फिर ठप, बटरफ्लाई वाल्व बना बाधा
किसानों ने की मुआवजे और बहाली की मांग
प्रभावित किसानों ने मांग की है कि अधिग्रहित क्षेत्र से अधिक उपयोग की गई भूमि का अलग से उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही निर्माण कार्य पूरा होने के बाद खेतों को पहले जैसी स्थिति में बहाल किया जाए, ताकि किसान बिना किसी अतिरिक्त नुकसान के दोबारा खेती शुरू कर सकें। किसानों का कहना है कि समय रहते समाधान नहीं निकला तो उनकी आर्थिक स्थिति पर इसका गंभीर असर पड़ेगा।
