दिघोरी में कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ा रहीं परेशानी, ग्रामीण अस्पताल की मांग फिर तेज

Bhandara Medical Services: दिघोरी क्षेत्र में सीमित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण ग्रामीणों को इलाज में भारी परेशानी हो रही है। 50 बिस्तरों वाले ग्रामीण अस्पताल की मंजूरी की मांग फिर से तेज हुई है।
दिघोरी में कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ा रहीं परेशानी
दिघोरी में कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ा रहीं परेशानी (सौैजन्यः सोशल मीडिया)
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Dighori Healthcare Issues: दिघोरी बड़ी क्षेत्र में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपलब्ध संसाधन अत्यंत सीमित होने के कारण लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। लंबे समय से यह शिकायत उठती रही है कि स्वास्थ्य केंद्र की दयनीय स्थिति के कारण मरीजों को उचित इलाज के लिए भटकना पड़ता है।

इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए यहां 50 से अधिक बिस्तरों वाला सुसज्जित ग्रामीण अस्पताल स्थापित करने का प्रस्ताव लगभग दो वर्ष पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा राज्य सरकार को भेजा गया था, लेकिन यह प्रस्ताव अब तक मंजूरी के लिए लंबित है। विशेष बात यह है कि दिघोरी के आसपास के लगभग 50 गाँवों ने संयुक्त रूप से यह प्रस्ताव जिलाधिकारी कार्यालय को सौंपा था, जिससे इस अस्पताल की आवश्यकता और गंभीरता स्पष्ट होती है।

दिघोरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद खराब

वर्तमान में दिघोरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति बेहद खराब है। सीमित स्टाफ, आधुनिक उपकरणों का अभाव और बुनियादी चिकित्सा सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई लोग मजबूरी में झोलाछाप या अप्रशिक्षित व्यक्तियों से इलाज करवाने को विवश हैं। जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक इस केंद्र को ग्रामीण अस्पताल का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक समस्या का समाधान संभव नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि जिला परिषद सदस्य, जो इस केंद्र के पदेन अध्यक्ष होते हैं, इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य मुद्दे पर प्राथमिकता से काम करें।

ग्रामीण अस्पताल की जरूरत क्यों?

यदि दिघोरी में प्रस्तावित ग्रामीण अस्पताल स्थापित हो जाता है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर, पर्याप्त स्वास्थ्य कर्मचारी और जरूरी उपकरण उपलब्ध हो सकेंगे। तब मरीजों को तत्काल और सही इलाज यहीं मिल पाएगा और दूर स्थित शहरों पर निर्भरता कम होगी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अस्पताल स्थापना के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध करवाई जाएगी। इसके बाद भवन निर्माण, पद सृजन और उपकरणों की उपलब्धता हेतु स्वतंत्र कार्यवाही प्रस्तावित है। ये भी पढ़: क्या हमारे मूल्य खत्म हो रहे? बढ़ते दुष्कर्म मामलों पर थिऑसोफिकल सोसायटी कार्यक्रम में उठे सवाल

सेवाओं का विस्तार आवश्यक

दिघोरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत कई उपकेंद्र आते हैं और पूरा क्षेत्र लगभग 50 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने का दायित्व निभाता है। जबकि वर्तमान में बेहद सीमित कर्मचारी कार्यरत हैं। ग्रामीण अस्पताल की स्थापना होने पर स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ेगा और उपचार में सुधार आएगा।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि दिघोरी जैसे बड़े क्षेत्र को ग्रामीण अस्पताल मिलना अत्यंत आवश्यक है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी देकर अस्पताल शीघ्र शुरू किया जाए, तो यह गरीब और वंचित वर्ग के लिए बड़ी राहत साबित होगा और स्वास्थ्य सेवाओं में वास्तविक सुधार संभव होगा।

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