भंडारा: जिप स्कूल के विदाई समारोह में बोलीं कविता उईके- उज्ज्वल भविष्य के लिए प्राथमिक शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण
Bhandara ZP School News: भंडारा जिप अध्यक्षा कविता उईके ने रावणवाड़ी स्कूल के विदाई समारोह में प्राथमिक शिक्षा की महत्ता पर जोर दिया और अभिभावकों से बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने की अपील की।
Bhandara News: भंडारा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्राथमिक शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। आज के समय में गांव को जिप स्कूल की ओर से सहयोग की अत्यंत आवश्यकता है। उक्त विचार भंडारा जिप की अध्यक्षा कविता उईके ने व्यक्त किए। वे रावणवाड़ी स्थित जिप प्राथमिक शाला में आयोजित कक्षा चौथी के छात्रों के विदाई समारोह एवं स्नेह सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रही थीं।
अपने संबोधन में उईके ने जिप स्कूलों की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है और शिक्षक विद्यार्थियों के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को कहीं बाहर भेजने के बजाय गांव के ही सरकारी स्कूल में प्रवेश दिलाएं ताकि स्कूल की पटसंख्या बढ़ सके। उन्होंने कहा कि स्कूलों में अब संस्कारक्षम शिक्षा की शुरुआत प्राथमिक स्तर से ही हो चुकी है, जो सुखद संकेत है।
कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसकी जिम्मेदारी हम सभी की है। इस अवसर पर शाला के कक्षा चौथी के विद्यार्थियों को उपहार देकर विदा किया गया। आंगनवाड़ी से प्राथमिक शाला में प्रवेश लेने वाले नन्हे विद्यार्थियों का परिचय कराकर उत्साहपूर्ण वातावरण में उनका स्वागत किया गया। कार्यक्रम के दौरान कक्षा तीसरी की छात्रा खुशबू भलावी का जन्मदिन सभी गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में मनाया गया और वर्ष भर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कृत भी किया गया।
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आध्यात्मिक व सामाजिक ज्ञान आवश्यक विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित अंबामाता मंदिर समिति के अध्यक्ष यादवराव कुथे ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथसाथ आध्यात्मिक और सामाजिक ज्ञान होना भी आवश्यक है, क्योंकि वे ही भविष्य के सुविज्ञ नागरिक हैं। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्याध्यापक महेश जगनिक ने प्रास्ताविक भाषण में स्कूल की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न उपक्रमों और विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।
