भंडारा: ‘शब्द ही जीवन की अभिव्यक्ति का माध्यम’, वसंत व्याख्यानमाला में स्नेहा शिनखेड़े का प्रेरक मार्गदर्शन
Bhandara News: शब्द केवल संवाद का जरिया नहीं, बल्कि मन की गहरी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम हैं। प्रसिद्ध लेखिका स्नेहा सुनील शिनखेड़े ने वसंत व्याख्यानमाला में शब्दों के महत्व पर प्रकाश डाला।
Bhandara Vasant Vyakhyanmala News: शब्द केवल संवाद का जरिया नहीं, बल्कि मन की गहरी भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम हैं। शब्द ही हमारा जीवन हैं, किंतु शब्दों से परे जाकर उनमें छिपे भावों को समझना ही उनका वास्तविक और प्रभावी उपयोग है।
उक्त विचार प्रसिद्ध लेखिका एवं वक्ता स्नेहा सुनील शिनखेड़े नागपुर ने व्यक्त किए। वे संस्कार भारती, भंडारा की ओर से सहकार नगर स्थित श्रीराम हनुमान मंदिर में आयोजित वसंत व्याख्यानमाला के दौरान शब्दों के पार विषय पर अपना द्वितीय पुष्प अर्पित कर रही थीं। अपने संबोधन में उन्होंने शब्दों के महत्व और उनकी शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शब्द मनुष्य के स्वभाव को दर्शाते हैं।
उन्होंने शब्दों के संयम पर जोर देते हुए कहा कि प्रशंसा शक्कर की तरह मीठी होती है, जबकि कठोर शब्द तीर की तरह मन को आहत कर सकते हैं। इंसान इस दुनिया से चला जाता है, लेकिन उसके बोले गए शब्द स्मृतियों के रूप में सदा जीवित रहते हैं। व्याख्यानमाला के समापन सत्र में स्नेहा शिनखेडे ने आद्य शंकराचार्य रचित जिह्वा प्रार्थना विषय पर अंतिम पुष्प प्रस्तुत किया।
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कार्यक्रम का संचालन अर्चना पथ्ये ने तथा आभार सारंग नखाते ने व्यक्त किया। समापन सत्र की अध्यक्षता रोशनी मनोज संघानी ने की। जबकि मुख्य अतिथि के रूप में नगरसेविका लक्ष्मी अभय भागवत उपस्थित रहीं। संचालन सई देशपांडे ने किया और आभार प्रदर्शन मोहन भाकरे ने किया। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष घनश्याम कानतोड़े का इस आयोजन में विशेष सहयोग रहा।
ज्ञान की देवी की आराधना सरस्वती देवी को समर्पित जिह्वा भूषण स्तोत्र के महत्व को समझाते हुए बताया कि यह वाणी की शुद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए अत्यंत प्रभावी है। द्वितीय पुष्प कार्यक्रम की अध्यक्षता मीरा सक्सेना ने की। इस अवसर पर नगरसेविका कुलप्रीत चड्ढा, संस्कार भारती की अध्यक्षा चंदा मुरकुटे, सुनील शिनखेडे, रामदास शहारे, सुमंत देशपांडे, दत्ता दाढ़ी, डॉ. प्रकाश मालगावे, मोहन भाकरे और नीता मलेवार सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
