1602 हेक्टेयर की फसलें तबाह, 602 हेक्टेयर की फसलें तबाह, 72 गांवों के 2233 किसान प्रभावित

Bhandara Unseasonal Rain: भंडारा जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से 72 गांवों की 602 हेक्टेयर से अधिक फसलें बर्बाद हो गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा से 2,233 किसान प्रभावित हुए हैं।
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Unseasonal Rain (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
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Bhandara Hailstorm Crop Damage: भंडारा जिले में पिछले एक सप्ताह के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 2 मई से 6 मई के बीच प्रकृति के बदलते मिजाज के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है। कृषि विभाग की ओर से प्रस्तुत प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, जिले के 72 गांवों में 602.90 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गई हैं। इस प्राकृतिक आपदा के चलते 2 हजार 233 किसान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, जिससे उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

नुकसान के आंकड़ों पर नजर डालें तो मोहाड़ी और तुमसर तहसील को बेमौसम बारिश की सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी है। मोहाडी तहसील के 18 गांव इससे प्रभावित हुए हैं, जहां कुल 693.50 हेक्टेयर क्षेत्र में से 395।50 हेक्टेयर की फसलें नष्ट हो गई हैं। वहीं तुमसर तहसील के 40 गांवों में बारिश का कहर दिखा, जहां 3 हजार 362 हेक्टेयर में से 200 हेक्टेयर की फसलों को नुकसान पहुंचा है।

ग्रीष्मकालीन धान की कटाई का सीजन

पवनी तहसील के 4 गांवों में 6.40 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कृषि विभाग के अनुसार भंडारा, साकोली, लाखनी और लाखांदुर तहसीलों में नुकसान का प्रमाण नगण्य रहा है। इस समय ग्रीष्मकालीन धान की कटाई का सीजन चल रहा है, ऐसे में अचानक हुई बारिश से कटकर रखी गई धान की फसल पूरी तरह भीग गई है।

धान के अलावा मक्का और फलसब्जियों के बागानों को भी भारी नुकसान हुआ है। कई स्थानों पर तेज हवाओं और ओलावृष्टि के कारण खड़ी फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। इससे उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है और किसानों के हाथ में आया हुआ निवाला प्रकृति ने छीन लिया है।

युद्धस्तर पर सर्वेक्षण कार्य शुरू

कृषि विभाग की ओर से जारी ये आंकड़े फिलहाल शुरुआती हैं। वास्तविक खेतों पर जाकर विस्तृत सर्वेक्षण करने के बाद नुकसान का आंकड़ा बदल सकता है। जिला प्रशासन ने तत्काल नुकसान का पंचनामा करने के निर्देश दिए हैं ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द सरकारी सहायता मिल सके। प्रशासन की टीमें अब युद्धस्तर पर सर्वेक्षण कार्य में जुट गई हैं ताकि किसानों को समय पर मुआवजा प्रदान किया जा सके।

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