Bhandara News: ग्रीष्मकाल की आहट के साथ ही जिले के वनांचलों में तेंदूपत्ता तुड़ाई का सीजन शुरू होने वाला है. इस व्यवसाय से जुड़े हजारों मजदूरों की आवाजाही को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग और मलेरिया विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है.
दरअसल, जंगलों में रहकर काम करने वाले इन संग्राहकों के माध्यम से जिले में मलेरिया के पैर पसारने की प्रबल संभावना बनी रहती है, जिसके चलते विभाग ने अभी से इन मजदूरों की निगरानी और सूची बनाने की प्रक्रिया पर काम शुरू कर दिया है.
वर्तमान में तेंदूपत्ता तुड़ाई के लिए संबंधित ठेकेदारों और मजदूरों के बीच अनुबंध और बातचीत का दौर चल रहा है. जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, जिले के हजारों संग्राहक स्थानीय जंगलों के साथसाथ पड़ोसी राज्यों के वनों की ओर रुख करेंगे.
तेंदूपत्ता तुड़ाई के दौरान ये मजदूर लंबे समय तक जंगलों के भीतर ही डेरा डालते हैं. घने जंगलों में रहने के कारण मच्छरों के काटने से इनके मलेरिया की चपेट में आने का खतरा सबसे अधिक होता है.
पूर्व के अनुभवों को देखते हुए प्रशासन की चिंता यह रहती है कि जब ये मजदूर काम खत्म कर अपने गांवों को लौटते हैं, तो उनके साथ मलेरिया का संक्रमण भी बस्ती तक पहुंच सकता है. संक्रमण की रोकथाम के लिए मलेरिया विभाग ने एक पुख्ता कार्यप्रणाली विकसित की है.
गांवगांव में तैनात आशा सेविकाओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने क्षेत्र के उन सभी मजदूरों की विस्तृत सूची तैयार करें जो जंगल जा रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग इस बात की पलपल की जानकारी रखता है कि मजदूर कब वापस लौट रहे हैं.
मजदूरों के लौटते ही उनके स्वास्थ्य की प्राथमिक जांच की जाती है. यदि किसी मजदूर में बुखार के लक्षण दिखाई देते हैं, तो तत्काल उसके रक्त के नमूने लेकर जांच सुनिश्चित की जाती है. पिछले कुछ वर्षों से अपनाई जा रही इसी सतर्कता के कारण जिले में मलेरिया के प्रसार को काफी हद तक नियंत्रित करने में सफलता मिली है.
राहत की बात यह है कि इस वर्ष अब तक जिले में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है. जिला मलेरिया विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से फरवरी 2026 के बीच जिले में कुल 36,778 लोगों के रक्त नमूनों की जांच की गई है.
संतोषजनक परिणाम यह रहे कि इस व्यापक जांच अभियान के दौरान एक भी व्यक्ति मलेरिया से संक्रमित नहीं पाया गया है. हालांकि, विभाग का कहना है कि तेंदूपत्ता सीजन के दौरान यह सतर्कता और अधिक बढ़ानी होगी ताकि जिले की शून्य संक्रमण वाली स्थिति को बरकरार रखा जा सके.