भंडारा में कागजों तक सीमित पथ विक्रेता समिति; 8 माह से बैठकें ठप, पुनर्वास के बिना उजाड़ा जा रहा रोजगार
Bhandara News: भंडारा नगर परिषद में पथ विक्रेता समिति केवल कागजों पर चल रही है। अधिनियम 2014 की अनदेखी कर बिना पुनर्वास के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से विक्रेताओं का रोजगार संकट में है।
Bhandara Municipal Council Committee News: भंडारा नगर परिषद में पथ विक्रेताओं के हितों की रक्षा के लिए गठित समिति केवल कागजों तक सीमित रह गई है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते समिति का कामकाज पूरी तरह ठप है, जिससे शहर में चल रही अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अधिनियम की अनदेखी
केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2009 में पथ विक्रेताओं के संरक्षण के लिए नियम बनाए गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार ने 2013 में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। इसी क्रम में भंडारा नगर परिषद ने 22 अगस्त 2024 को पथ विक्रेता समिति का गठन किया था।
पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम 2014 के अनुसार किसी भी पथ विक्रेता को हटाने से पहले उसका पुनर्वास या वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद, नगर परिषद द्वारा बिना पूर्व सूचना और समिति की सहमति के सीधे कार्रवाई की जा रही है।
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अधिकार मिलने के बावजूद निष्क्रियता
12 मार्च 2025 को महाराष्ट्र शासन के राजपत्र में समिति को अधिकार दिए जाने का प्रावधान प्रकाशित हुआ, लेकिन अब तक इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया है। इससे पथ विक्रेताओं और उनके परिवारों के मूल अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
8 महीने से नहीं हुई बैठक
नगर परिषद चुनाव संपन्न होने और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति के चार महीने बाद भी समिति की एक भी बैठक नहीं हो सकी है। 11 सितंबर 2025 को प्रस्तावित पहली बैठक तत्कालीन मुख्याधिकारी की अनुपस्थिति के कारण नहीं हो पाई थी। इसके बाद कई बार अनुरोध के बावजूद प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष ने इस मुद्दे को नजरअंदाज किया है।
नियमों का उल्लंघन, रोजगार पर संकट
राजपत्र में स्पष्ट है कि नगर परिषद स्तर पर समिति का सक्रिय रहना अनिवार्य है, लेकिन भंडारा में इसका पालन नहीं हो रहा। बिना पुनर्वास के पथ विक्रेताओं का सामान जब्त किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों परिवारों के रोजगार पर संकट गहरा गया है।
संगठनों की मांग
पथ विक्रेता संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द समिति की बैठक बुलाई जाए और कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि विक्रेताओं के अधिकारों की रक्षा हो सके।
